बाल पोषण, स्मार्ट आंगनवाड़ी और लैंगिक संवेदनशीलता में रोहतक बना मॉडल जिलाः डीसी सचिन गुप्ता

कुपोषण के खिलाफ प्रभावी अभियान से एसएएम बच्चों की संख्या 330 से घटकर 24 हुई।

बाल पोषण, स्मार्ट आंगनवाड़ी और लैंगिक संवेदनशीलता में रोहतक बना मॉडल जिलाः डीसी सचिन गुप्ता

रोहतक, गिरीश सैनी। जिला प्रशासन ने पोषण, प्रारंभिक शिक्षा, भावनात्मक विकास, व्यवहारिक शिक्षा, बाल संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी को एक साथ मजबूत करने के लिए एक समन्वित रणनीति अपनाई है। उपायुक्त सचिन गुप्ता ने महिला एवं बाल विकास विभाग की मासिक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्चे को जीवन के शुरुआती वर्षों में उचित पोषण, आनंददायक शिक्षा, भावनात्मक सुरक्षा और सुरक्षित वातावरण मिल सके।

उपायुक्त सचिन गुप्ता ने कहा कि  हमारा लक्ष्य केवल पोषण संकेतकों में सुधार नहीं बल्कि बच्चों को स्वस्थ, आत्मविश्वासी, भावनात्मक रूप से मजबूत और सामाजिक रूप से जागरूक बनाना है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन ने कुपोषण पर बड़ी सफलता की है। एसएएम बच्चों की संख्या 330 से घटकर 24 हो गई है। उन्होंने कहा कि जिले की एक बड़ी उपलब्धि यह रही है कि निरंतर ग्रोथ मॉनिटरिंग, पोषण परामर्श, पूरक आहार व्यवस्था और नियमित गृह भ्रमण के माध्यम से कुपोषण में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य विभाग की टीमों तथा माताओं की काउंसलिंग के माध्यम से यह सफलता प्राप्त हुई है। इसके साथ ही पहले 1000 दिन अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं व धात्री माताओं को स्तनपान, टीकाकरण, पूरक आहार, मातृ पोषण तथा शिशु विकास संबंधी परामर्श दिया जा रहा है। आंगनवाड़ी केंद्रों पर पोषण वाटिका को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे समुदाय में स्वस्थ खान-पान की आदतों को विकसित किया जा सके।

उपायुक्त ने कहा कि जिला में आंगनवाड़ी केंद्रों को तेजी से स्मार्ट आंगनवाड़ी के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां बच्चों के लिए खिलौने, पहेलियां, रंगीन चार्ट, गतिविधि किट और अन्य शिक्षण सामग्री उपलब्ध करवाई गई है। इन केंद्रों में बच्चों को खेल-खेल में जीवन कौशल एवं व्यवहारिक शिक्षा दी जा रही है। उपायुक्त ने कहा कि हाथ धोने व स्वच्छता की आदतें, फल-सब्जियों को धोकर खाना, डस्टबिन का सही उपयोग, खिलौनों व सामग्री को व्यवस्थित रखना, आपसी सहयोग और सम्मानजनक व्यवहार, पर्यावरण जागरूकता व पौधों को पानी देना आदि के बारे में बच्चों को बताया जा रहा है।

उपायुक्त ने कहा कि बाल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में अब आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार गुड टच-बैड टच, व्यक्तिगत सुरक्षा तथा भरोसेमंद व्यक्ति की पहचान संबंधी जानकारी भी दी जा रही है। इसके साथ ही बच्चों को लडक़े-लड़कियों के बीच समानता, सम्मान और सहयोग की भावना विकसित करने हेतु लैंगिक संवेदनशीलता पर भी जागरूक किया जा रहा है।

उपायुक्त ने कहा कि जिला में पोस्को अधिनियम, मासिक धर्म स्वच्छता, एनीमिया रोकथाम, भावनात्मक स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा, कानूनी जागरूकता, व्यक्तिगत सुरक्षा एवं आत्मविश्वास आदि विषयों को लेकर जागरूकता कार्यक्रमों में तेजी लाई गई है। इन पहलों की सफलता में समुदाय की भागीदारी भी एक मजबूत आधार बनी है। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन यह सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है कि प्रत्येक बच्चे को पोषण, शिक्षा, भावनात्मक देखभाल और सुरक्षित वातावरण मिल सके। उन्होंने कहा कि जब बच्चे स्वस्थ, सुरक्षित और भावनात्मक रूप से मजबूत होते हैं, तो वे एक मजबूत और संवेदनशील समाज की नींव बनते हैं। बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यक्रम अधिकारी दीपिका सैनी बाल संरक्षण अधिकारी करमिन्द्र कौर, डीसीपीओ कुलदीप व सभी सीडीपीओ मौजूद थी।