अल्जाइमर के शुरुआती संकेत पहचानना जरूरी, जागरूकता से बचाव संभव

पीजीआईएमएस में विश्व अल्जाइमर दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम।

अल्जाइमर के शुरुआती संकेत पहचानना जरूरी, जागरूकता से बचाव संभव

रोहतक, गिरीश सैनी। विश्व अल्जाइमर दिवस पर पीजीआईएमएस, रोहतक के मनोरोग विभाग में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। विभागाध्यक्षा प्रो. सुजाता सेठी के नेतृत्व में ओपीडी में पोस्टर प्रदर्शनी लगाकर लोगों को अल्जाइमर और डिमेंशिया के लक्षणों व बचाव के प्रति जागरूक किया गया।

प्रो. सुजाता सेठी ने बताया कि इस वर्ष का संदेश डिमेंशिया की जल्द पहचान के महत्व पर केंद्रित है। डॉ. हितेश खुराना ने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा बढ़ता है और महिलाओं में इसकी संभावना अधिक देखी जाती है। रोजमर्रा के काम भूलना, रास्ता भटकना, परिचितों को पहचानने में कठिनाई और दैनिक कार्यों में असमर्थता इसके प्रमुख लक्षण हैं।

उन्होंने कहा कि मधुमेह, उच्च रक्तचाप, नशे का सेवन, शारीरिक निष्क्रियता और सामाजिक अलगाव जैसे जोखिम कारकों को नियंत्रित किया जा सकता है। नियमित व्यायाम, रक्तचाप-शुगर की निगरानी, पर्याप्त नींद और तंबाकू-शराब से दूरी जरूरी है।

डॉ. जोगेंद्र कैरो ने सक्रिय जीवन शैली, रुचियों और मानसिक गतिविधियों को लाभकारी बताया। डॉ. भूपेंद्र सिंह ने बताया कि वृद्धावस्था मनोरोग एवं डिमेंशिया क्लीनिक में हर सप्ताह 20 से 30 मरीजों को उपचार मिल रहा है।

कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल और निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने जागरूकता प्रयासों की सराहना की।