एमडीयू की प्रो. रितु पसरीजा के शोध प्रोजेक्ट को मिली 60 लाख की ग्रांट
डीबीटी ने रोगजनक फंगस पर महत्वपूर्ण अनुसंधान की दी मंजूरी; कुलपति प्रो पूनियाँ ने दी बधाई
रोहतक, गिरीश सैनी। एमडीयू के बायोकेमिस्ट्री विभाग की प्रोफेसर डॉ. रितु पसरीजा की शोध परियोजना को भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) ने 60 लाख रुपये का अनुदान स्वीकृत किया है। इस परियोजना में सेंटर फॉर बायोइन्फरमेटिक्स की प्राध्यापिका डॉ. महक डांगी सह-प्रमुख अन्वेषक (को-पीआई) के रूप में योगदान देंगी।
शोध का उद्देश्य क्रिप्टोकॉकस नोफॉर्मन्स नामक रोगजनक फंगस की संक्रमण पैदा करने की क्षमता से जुड़े जैविक पहलुओं को समझना है। इसके तहत फंगस की कोशिकाओं के विभिन्न कोशिकांगों के बीच होने वाले संवाद का अध्ययन किया जाएगा। इससे संक्रमण की प्रक्रिया को समझने और भविष्य में एंटी फंगल उपचार के लिए नए लक्ष्य तलाशने में मदद मिल सकेगी।
कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ ने दोनों शोधकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित शोध अनुदान मिलना विश्वविद्यालय की बढ़ती शोध क्षमता और शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रमाण है।
डीबीटी की तकनीकी विशेषज्ञ समिति ने वैज्ञानिक परिकल्पना, प्रारंभिक शोध परिणामों और कार्ययोजना के मूल्यांकन के बाद परियोजना को मंजूरी दी है। इसके तहत एक जूनियर रिसर्च फेलो का पद भी स्वीकृत किया गया है।

Girish Saini


