प्राथमिकता एवं एमएसएमई ऋण में उत्कृष्ट प्रदर्शन, कृषि ऋण बढ़ाने के निर्देश

एडीसी नरेंद्र कुमार ने लंबित ऋण आवेदनों के शीघ्र निपटान व वित्तीय समावेशन पर जोर दिया।

प्राथमिकता एवं एमएसएमई ऋण में उत्कृष्ट प्रदर्शन, कृषि ऋण बढ़ाने के निर्देश

रोहतक, गिरीश सैनी। अग्रणी जिला प्रबंधक कार्यालय द्वारा दिसंबर 2025 तिमाही से संबंधित जिला स्तरीय समीक्षा बैठक/परामर्शदात्री समिति एवं जिला स्तरीय सुरक्षा समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए अतिरिक्त उपायुक्त नरेंद्र कुमार ने जिला में बैंकों के जमा-ऋण अनुपात में 60 प्रतिशत के लक्ष्य के मुकाबले 65 प्रतिशत की उपलब्धि पर संतोष व्यक्त किया। वहीं प्राथमिकता क्षेत्र के अंतर्गत कुल ऋण में 40 प्रतिशत के लक्ष्य के विरुद्ध 54 प्रतिशत उपलब्धि को सराहनीय बताया। हालांकि कृषि ऋण के मामले में 18 प्रतिशत लक्ष्य के मुकाबले केवल 18 प्रतिशत उपलब्धि पर उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए।

अतिरिक्त उपायुक्त नरेंद्र कुमार ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है, इसलिए पात्र किसानों को समय पर कृषि ऋण उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सभी बैंकों को निर्देश दिए कि प्राथमिकता क्षेत्र एवं कृषि ऋण के अंतर्गत अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाए। वार्षिक ऋण योजना 2025-26 की दिसंबर 2025 तिमाही की समीक्षा करते हुए बताया गया कि कृषि क्षेत्र में 2514 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 2122 करोड़ (85 प्रतिशत) की उपलब्धि रही। वहीं प्राथमिकता क्षेत्र में 7554 करोड़ के लक्ष्य के विरुद्ध 8060 करोड़ (107 प्रतिशत) तथा एमएसएमई क्षेत्र में 4199 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 5604 करोड़ (133 प्रतिशत) की उपलब्धि दर्ज की गई। एडीसी ने इन उपलब्धियों के लिए बैंकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कृषि क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया।

एडीसी नरेंद्र कुमार ने विभिन्न विभागों द्वारा प्रायोजित योजनाओं के अंतर्गत लंबित ऋण आवेदनों पर भी चर्चा की। लंबित मामलों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने सभी बैंकों को निर्देश दिए कि ऐसे आवेदनों का निपटान सात दिनों के अंदर सुनिश्चित किया जाए। साथ ही अगली बैठक में डिफॉल्टर सूची एवं अन्य बिंदुओं में आवश्यक संशोधन करने के निर्देश भी दिए। बैठक में वर्ष 2026-27 के लिए जिला की वार्षिक ऋण योजना का प्रस्ताव भी सर्वसम्मति से अनुमोदित किया गया।

आरबीआई के एलडीओ रविंदर नैन ने सभी बैंकों को आगामी वित्तीय वर्ष 2025-26 के लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु आवश्यक कदम उठाने पर बल दिया। उन्होंने वित्तीय समावेशन के तहत संतृप्ति अभियान, अनक्लेम्ड जमा खातों के निपटान एवं केवाईसी अद्यतन करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। एलडीएम महावीर प्रसाद ने कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ), सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) एवं संयुक्त देयता समूह (जेएलजी) जैसी योजनाओं के माध्यम से कृषि ऋण बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। डीपीएम योगेश पाराशर ने बताया कि शीघ्र ही स्वयं सहायता समूहों को लगभग 8 करोड़ रुपये के ऋण वितरण का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें उत्कृष्ट कार्य करने वाले समूहों एवं बैंक अधिकारियों को सम्मानित किया जाएगा। बैठक के दौरान साइबर धोखाधड़ी के मामलों में बैंकों से अपेक्षित सहयोग पर भी चर्चा की गई। सभी बैंकों से अनुरोध किया गया कि पुलिस द्वारा मांगे जाने पर ट्रांजेक्शन आईपी, सीसीटीवी फुटेज, खाता विवरण एवं केवाईसी दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराए जाएं।