समावेशी समाज के निर्माण के लिए पंच-परिवर्तन अपनाएं युवाः कुलपति प्रो. मिलाप पुनिया

डॉ. बी.आर. अंबेडकर और पंच-परिवर्तन की भूमिका विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी।

समावेशी समाज के निर्माण के लिए पंच-परिवर्तन अपनाएं युवाः कुलपति प्रो. मिलाप पुनिया

रोहतक, गिरीश सैनी। एमडीयू कुलपति प्रो. मिलाप पुनिया ने कहा कि समावेशी समाज का निर्माण केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि व्यक्ति के विचार और व्यवहार में बदलाव से संभव है। उन्होंने कहा कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर के सिद्धांत-समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व आज भी प्रासंगिक हैं और इन्हीं मूल्यों पर पंच-परिवर्तन आधारित है।

आईएचटीएम हॉल में विधि और संस्कृत विभाग द्वारा छात्र कल्याण कार्यालय, एनएसएस और वाईआरसी के सहयोग से- समावेशी समाज के निर्माण में डॉ. बी.आर. अंबेडकर और पंच-परिवर्तन की भूमिका विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि उज्ज्वल भविष्य के लिए पंच-परिवर्तन को जीवन में अपनाना आवश्यक है। 

उन्होंने कहा कि युवा डॉ. अंबेडकर के विचारों को आत्मसात करते हुए सामाजिक समरसता को मजबूत करें और कुटुंब प्रबोधन के माध्यम से संस्कारों को सुदृढ़ करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वदेशी अपनाकर, आत्मनिर्भर बनकर और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की धारा पहुंचाकर ही सच्चे अर्थों में समावेशी राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है।

बतौर मुख्य अतिथि, भाजपा के प्रदेश महामंत्री (संगठन) फणीन्द्र नाथ शर्मा ने कहा कि पंच-परिवर्तन की अवधारणा समाज में नैतिकता, जागरूकता और समरसता को सुदृढ़ करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने आगे कहा कि  पंच-परिवर्तन का मूल उद्देश्य है, एक ऐसा समाज जहां हर व्यक्ति को समान अवसर और सम्मान प्राप्त हो। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम समाज में नई सोच और दिशा प्रदान करते हैं।

मुख्य वक्ता के रूप में डॉ श्यामा प्रसाद मुख़र्जी रिसर्च फाउंडेशन, नई दिल्ली के निदेशक बिनय कुमार सिंह ने अपने उद्बोधन में सामाजिक न्याय, समान अवसर और शिक्षा को समावेशी समाज की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि जब तक समाज के प्रत्येक वर्ग को समान अवसर नहीं मिलते, तब तक वास्तविक विकास संभव नहीं है।

डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. सपना गर्ग ने स्वागत भाषण में संगोष्ठी के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। विधि विभागाध्यक्षा प्रो. सोनू देहमिवाल ने आभार व्यक्त किया। इस दौरान एनएसएस यूनिट्स ने सामाजिक न्याय एवं लैंगिक संवेदनशीलता विषय पर प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया।