जलवायु संकट से जूझते गांव अपनाएं वैज्ञानिक रणनीति और स्थानीय समाधानः वीसी प्रो. मिलाप पूनियाँ

परिवर्तनशील जलवायु पर इंटरनेशनल ट्रेनिंग प्रोग्राम।

जलवायु संकट से जूझते गांव अपनाएं वैज्ञानिक रणनीति और स्थानीय समाधानः वीसी प्रो. मिलाप पूनियाँ

रोहतक, गिरीश सैनी। बदलती जलवायु के दौर में ग्रामीण भारत की चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में स्थानीय स्तर पर ठोस रणनीति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना बेहद जरूरी है। ये बात एमडीयू के कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ ने परिवर्तनशील जलवायु में सुदृढ़ ग्रामीण समुदायों का निर्माण विषय पर आयोजित इंटरनेशनल ट्रेनिंग प्रोग्राम में कही।

राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान, भारत सरकार और सेंटर ऑन इंटीग्रेटेड रूरल डेवलपमेंट फॉर एशिया एंड द पैसिफिक (मुख्यालयः ढाका, बांग्लादेश) द्वारा संयुक्त रूप से हैदराबाद में आयोजित इस इंटरनेशनल ट्रेनिंग प्रोग्राम के समापन सत्र में एमडीयू कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।

अपने प्रभावी संबोधन में  कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ ने कहा कि हीटवेव, प्री-मानसून बारिश में बढ़ोतरी, अनियमित वर्षा और ओलावृष्टि जैसी घटनाएं ग्रामीण आजीविका को सीधे प्रभावित कर रही हैं। इनका असर फसल चक्र, उत्पादन और किसानों की आय पर साफ दिखाई दे रहा है। उन्होंने कृषि के साथ-साथ गैर-कृषि गतिविधियों पर पड़ने वाले नुकसान के आकलन की भी जरूरत बताई। कुलपति प्रो. पूनियाँ ने कहा कि अब समय आ गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों की जलवायु संवेदनशीलता, जोखिम और उनकी अनुकूलन क्षमता का गहराई से अध्ययन किया जाए। खासकर एशिया-प्रशांत क्षेत्र के गंगा और मेकांग बेसिन में रहने वाले समुदायों को सशक्त बनाने के लिए यह जरूरी है। उन्होंने सुझाव दिया कि जमीनी स्तर पर बदलाव के लिए सूक्ष्म आंकड़ों पर आधारित योजना, विभागों के बीच बेहतर समन्वय, सहभागी और विकेंद्रीकृत शासन प्रणाली तथा नवाचार को बढ़ावा देना होगा। तभी ग्रामीण समुदायों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से सुरक्षित किया जा सकेगा।