कलंक नहीं, समझ जरूरी: विश्वकर्मा यूनिवर्सिटी में मानसिक स्वास्थ्य पर संवाद

कलंक नहीं, समझ जरूरी: विश्वकर्मा यूनिवर्सिटी में मानसिक स्वास्थ्य पर संवाद

रोहतक/पलवल, गिरीश सैनी। सेवा संकल्प अभियान और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता सप्ताह के तहत श्री विश्वकर्मा स्किल यूनिवर्सिटी में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर, एडीएचडी, न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर और मानसिक बीमारियों से जुड़े सामाजिक कलंक पर चर्चा हुई।

इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ, रोहतक की निदेशक-सह-सीईओ डॉ. सुजाता सेठी, पीजीआईएमएस रोहतक के मनोरोग विभाग की जूनियर रेजिडेंट डॉ. ईरा और क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. जोगिंदर कैरो ने विद्यार्थियों से संवाद किया। विशेषज्ञों ने ऑटिज्म व एडीएचडी के शुरुआती लक्षणों की पहचान, समय पर हस्तक्षेप, उपचार और प्रबंधन की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी समग्र स्वास्थ्य का अहम हिस्सा है। मानसिक बीमारियों से जुड़े भ्रम और भेदभाव दूर कर संवेदनशील एवं सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार अपनाना जरूरी है। इंटरैक्टिव सत्र में विद्यार्थियों ने सवाल पूछकर सक्रिय भागीदारी की।

कार्यक्रम का आयोजन मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. शिव कुमार ने किया। डीन एवं रजिस्ट्रार सुचित्रा वशिष्ठ और सुमन वशिष्ठ मौजूद रही।