ग्राम स्वराज की दिशा में एक ठोस कदम है विकसित भारत-जी राम जी योजनाः डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान

ग्राम स्वराज की दिशा में एक ठोस कदम है विकसित भारत-जी राम जी योजनाः डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान

करनाल, गिरीश सैनी। विकसित भारत-जी राम जी योजना ग्रामीण विकास और आजीविका के प्रश्नों पर विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप गंभीर चिंतन का परिणाम है। ये योजना महात्मा गांधी नरेगा योजना में समय के साथ सामने आई कमियों को दूर करते हुए उसे नए दौर और नई जरूरतों के अनुसार अधिक प्रभावी बनाती है। ये उद्गार हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने सरपंचों एवं ग्राम पंचायत सचिवों के जागरूकता कार्यक्रम को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक प्रो. धीर सिंह ने की। इस दौरान जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमित कुमार भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

मुख्य वक्ता डॉ. चौहान ने कहा कि वर्ष 2004 की तुलना में आज के गांव अधिक विकसित, सक्षम और सम्पन्न हो चुके हैं। गांवों की जरूरतें बदली हैं, इसलिए मनरेगा में सुधार और संवर्धन समय की मांग थी। इसी सोच का परिणाम विकसित भारत-जी राम जी योजना है, जो ग्राम स्वराज की भावना को मजबूत करती है। उन्होंने बताया कि इस योजना के अंतर्गत ग्रामीणों को अब 100 दिनों के बजाय 125 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय और आर्थिक सुरक्षा बढ़ेगी। इसके साथ ही मजदूरी भुगतान की प्रक्रिया को तेज करते हुए 15 दिन के बजाय 7 दिन में भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि श्रमिकों को समय पर उनकी मेहनत का पूरा लाभ मिल सके।

निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने जोर देकर कहा कि योजना में केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि ग्राम समुदाय के लिए उपयोगी अवसंरचना - जैसे तालाब, जल संरक्षण, सामुदायिक भवन, ग्रामीण परिसंपत्तियों के निर्माण - पर विशेष ध्यान दिया गया है। इससे गांवों की दीर्घकालिक विकास जरूरतें पूरी होंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में ग्राम सभा के माध्यम से विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी, ताकि स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार कामों का चयन हो और ग्रामवासियों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

योजना के नाम पर प्रकाश डालते हुए डॉ. चौहान ने कहा कि हरियाणा की सांस्कृतिक परंपरा में हम एक-दूसरे से मिलने पर जय राम जी कहते हैं और ग्राम समुदाय को गाम-राम के रूप में देखते हैं। इसी सांस्कृतिक भावना को ध्यान में रखते हुए इस योजना का नाम जी राम जी रखा गया है, जो हमारी लोक-संस्कृति और आत्मीयता को दर्शाता है। उन्होंने उपस्थित सरपंचों और पंचायत सचिवों का आह्वान किया कि वे इस योजना की भावना को समझें, ग्राम सभाओं को सक्रिय बनाएं और विकसित भारत के संकल्प में गांवों की निर्णायक भूमिका सुनिश्चित करें।