जगजाहिर हुई बीजेपी की महिला आरक्षण विरोधी नीति व नीयतः पूर्व सीएम हुड्डा

जगजाहिर हुई बीजेपी की महिला आरक्षण विरोधी नीति व नीयतः पूर्व सीएम हुड्डा

रोहतक, गिरीश सैनी। पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भाजपा सरकार की महिला आरक्षण विरोधी नीति व नीयत को आंकड़ों व तथ्यों के साथ उजागर करते हुए महिला आरक्षण में जानबूझकर की जा रही देरी की निंदा की है।

रोहतक में एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए हुड्डा ने तथ्यों, संवैधानिक प्रक्रिया तथा टाइम-लाइन के आधार पर स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण कांग्रेस की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता रही है, जबकि भाजपा सरकार ने इसे राजनीतिक लाभ के लिए टाला और अब जनता में भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि वास्तविकता यह है कि 2023 का महिला आरक्षण वाला नारी शक्ति वंदन अधिनियम संविधान का अभिन्न अंग बन चुका है। सितंबर 2023 में संसद के दोनों सदनों ने सर्वसम्मति से इसे पारित किया था और राष्ट्रपति ने भी इस पर मुहर लगाई। इसके 3 साल बाद भी बीजेपी ने आरक्षण को लागू नहीं किया, क्योंकि बीजेपी इसे लागू ही नहीं करना चाहती। यहां तक कि आरक्षण विधेयक को अधिसूचित करने का कार्य भी बीजेपी ने 16 अप्रैल 2026 को रात 9:55 बजे किया। यानी पूरे 30 माह तक इस महत्वपूर्ण विधेयक को अधिसूचित तक नहीं किया गया।

अब इस आरक्षण को और लटकाने के मकसद से सरकार ने जानबूझकर बिना जनगणना के संसद में परिसीमन बिल पेश किया और उस बिल के साथ चालाकी से महिला आरक्षण को जोड़ दिया। विपक्ष और पूरा देश बीजेपी की इस चाल को समझ गया और इस चाल को कामयाब नहीं होने दिया। विपक्ष मांग कर रहा है कि जो बिल 2023 में पास हो चुका है, उसे फौरन लागू किया जाए। इसलिए सत्ता में बैठे लोगों की हालत अब खिसियानी बिल्ली जैसी हो गई है और वो अपनी महिला विरोधी नीति को छिपाने के लिए जनता में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।  

पूर्व सीएम हुड्डा ने बताया कि पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण कांग्रेस की देन है। स्व. राजीव गांधी के नेतृत्व में लाए गए 73वें और 74वें संविधान संशोधन के माध्यम से ग्राम पंचायत, ब्लॉक पंचायत तथा जिला पंचायतों में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण सुनिश्चित किया गया, जिसके परिणामस्वरूप आज लगभग 15 लाख महिलाएं विभिन्न स्तरों पर निर्वाचित हैं और उनका प्रतिनिधित्व 40% तक पहुंच गया है। यानी कांग्रेस ने महिलाओं के काम किया, बीजेपी की तरह नाटक नहीं किया। इसके बाद कांग्रेस ने ही 2010 में राज्यसभा में, जहां उनका संख्या बल था, इस विधेयक को पारित कराया था। लोकसभा में इसे पारित नहीं कराया जा सका क्योंकि वहां गठबंधन सरकार थी। लेकिन बीजेपी ने बिल पास होने व कानून बनने के बाद भी इसे लागू नहीं किया।