सुपवा के छात्रों ने किया किलाजफरगढ़ का शैक्षणिक भ्रमण

दादा लख्मी चंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विवि (डीएलसी सुपवा), रोहतक के प्लानिंग एवं आर्किटेक्चर विभाग के बैचलर इन आर्किटेक्चर के द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों के एक दल ने किलाजफरगढ़ का दौरा कर लोकभाषा को डिकोड किया। इस दौरान छात्रों ने किले को बनाने में प्रयोग स्वदेशी निर्माण तकनीकों को बारीकी से समझते हुए उनका विश्लेषण किया।

सुपवा के छात्रों ने किया किलाजफरगढ़ का शैक्षणिक भ्रमण

रोहतक, गिरीश सैनी। दादा लख्मी चंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विवि (डीएलसी सुपवा), रोहतक के प्लानिंग एवं आर्किटेक्चर विभाग के बैचलर इन आर्किटेक्चर के द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों के एक दल ने किलाजफरगढ़ का दौरा कर लोकभाषा को डिकोड किया। इस दौरान छात्रों ने किले को बनाने में प्रयोग स्वदेशी निर्माण तकनीकों को बारीकी से समझते हुए उनका विश्लेषण किया।

प्लानिंग एवं आर्किटेक्चर विभाग के एफसी अजय बाहू जोशी ने बताया कि इस शैक्षणिक भ्रमण का उद्देश्य छात्रों को किला जफरगढ़ में प्रयुक्त निर्माण सामग्री व वास्तुकला से अवगत कराना था। इस दौरान छात्रों ने पारंपरिक बस्तियों के पैटर्न को समझा व उसका डॉक्यूमेंटेशन तैयार किया। ऐतिहासिक किले की स्वदेशी निर्माण तकनीकों का विश्लेषण करने के साथ ही स्थानीय सामग्रियों व जलवायु-संवेदनशील डिजाइन के बीच संबंध का अध्ययन किया।

आर्किटेक्ट प्रदीप कुमार ने छात्रों का मार्गदर्शन करते हुए बताया कि जींद राजा के सरूप सिंह ने 1858-59 में इस किले का निर्माण कराया था। वर्ष 1858 से लेकर जींद की आजादी (मार्च 1948) तक ये किला जींद राजा के अधीन रहा। इसके बाद यह सरकार के अधीन आ गया और किले की जमीन को वन विभाग को सौंप दिया गया। हरियाणा का गठन 1 नवंबर 1966 को होने के कुछ समय बाद यहां हरियाणा आर्म्ड फोर्स का ट्रेनिंग सेंटर भी खुला।