पूर्व सीएम हुड्डा ने बीजेपी पर लगाया हरियाणा व हरियाणवी से नफरत करने का आरोप
कहा, हाईकोर्ट के फैसले ने खोली बीजेपी सरकार की पोल।
रोहतक/चंडीगढ़, गिरीश सैनी। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने एचपीएससी की भर्तियों, सफाई कर्मियों की हड़ताल व राहुल गांधी के गुरुग्राम दौरे को लेकर पत्रकारों से बातचीत की।
किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए हुड्डा ने कहा कि कृषि कानूनों के खिलाफ 750 किसानों ने अपनी जान कुर्बान की, इसलिए कांग्रेस ने सदन में बाकायदा प्रस्ताव रखा। जबकि बीजेपी ने शहीद किसानों को कोई मुआवजा तक नहीं दिया। उस समय कांग्रेस ने निजी कोष से किसान परिवारों की आर्थिक मदद की और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने उनकी आवाज उठाई। राहुल गांधी व पूरी कांग्रेस ने किसानों के संघर्ष का पूरी तरह साथ दिया और बीजेपी को कृषि कानून वापिस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। किसान कृषि कानूनों से तो बच गए, लेकिन सरकार ने अब तक एमएसपी की मांग को पूरा नहीं किया।
हुड्डा ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि बीजेपी सरकार को हरियाणा और हरियाणवियों से नफरत है, इसलिए लगातार प्रदेश की भर्तियों में बाहरियों को नियुक्ति मिल रही हैं। इंटरव्यू में बाहर वालों को ज्यादा नंबर देकर सिलेक्ट किया जा रहा है और हरियाणवी युवा अदालतों के चक्कर काट रहे हैं। असिस्टेंट प्रोफेसर (हिन्दी) की भर्ती का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि इसमें सामान्य वर्ग के 60 चयनित अभ्यार्थियों में से 41 अन्य राज्यों के हैं। यही खेल तमाम भर्तियों में खेला जा रहा है। जानबूझकर 35 प्रतिशत का क्राइटेरिया लागू करके हरियाणवियों को बाहर किया गया और अन्य राज्य के लोगों को प्राथमिकता देकर भर्ती किया गया।
पूर्व सीएम हुड्डा ने हाईकोर्ट द्वारा हरियाणा में असिस्टेंट प्रोफेसर (अंग्रेजी) भर्ती को रद्द किए जाने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि ये युवाओं के संघर्ष की जीत है। इस फैसले ने न सिर्फ प्रदेश सरकार बल्कि सरकार द्वारा नियुक्त एचपीएससी चेयरमैन की भी पोल खोलकर रख दी है। ये लोग लगातार हरियाणवी युवाओं को अपमानित करने में लगे हुए थे, लेकिन माननीय अदालत के फैसले ने साफ कर दिया है कि हरियाणा के युवा तो योग्य हैं, लेकिन उन्हें भर्तियों से बाहर करने के लिए दोषपूर्ण प्रक्रिया को अपनाया गया।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि असिस्टेंट प्रोफेसर (इंग्लिश) के 613 पदों पर मात्र 151 अभ्यर्थियों का चयन किया गया और बाकी पद खाली छोड़ दिए गए। डीएससी वर्ग के साथ सबसे बड़ा अन्याय करते हुए 60 रिजर्व सीट्स में से केवल 1 का चयन किया गया। 35% कंडीशंस की आड़ में बाकी सीटें खाली छोड़ दी गईं। अब कोर्ट के फैसले से स्पष्ट है कि सरकार की 11.11.2022 की गाइडलाइन के कुछ प्रावधान यूजीसी गाइडलाइन 2018 के क्लॉज़ 4, 5 और 6 का उल्लंघन करते हैं, इसलिए इनके आधार पर जारी विज्ञापन और भर्ती प्रक्रिया भी तय व्यवस्था के खिलाफ है।
पूर्व सीएम ने असिस्टेंट प्रोफेसर (हिंदी व अंग्रेजी) के साथ अन्य भर्तियों का भी उदाहरण देकर सरकार की साजिशों को उजागर करते हुए बताया कि असिस्टेंट प्रोफेसर (साइकोलॉजी) भर्ती में भी 85 पद के लिए 400 अभ्यर्थियों में से मात्र 3 को ही पास किया गया। हरियाणा पावर यूटिलिटीज में असिस्टेंट इंजीनियर एई/एसडीओ भर्ती में 214 अभ्यर्थियों को डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के लिए बुलाया गया, जिसमें से केवल 29 हरियाणा के थे।
एचपीएससी ने विकास और पंचायत विभाग में एसडीई (सिविल) की भर्ती में सामान्य वर्ग के 48 पदों में से अन्य प्रदेशों के 19 अभ्यर्थियों का चयन किया है। इससे पहले दिसंबर 2023 में सरकार ने 7 बीडीपीओ भर्ती किए, जिनमें से 4 गैर-हरियाणवी थे। इसी तरह लेक्चरर ग्रुप-बी (टेक्निकल एजुकेशन) की भर्ती में सामान्य श्रेणी के 157 में से 103 अभ्यर्थी हरियाणा से बाहर के चुने गए थे।
पूर्व सीएम हुड्डा ने प्रदेश के सफाई कर्मियों की मांगों को अपना समर्थन देने की बात दोहराई और कहा कि सरकार को तुरंत संज्ञान लेते हुए उनकी मांगे माननी चाहिए व हड़ताल को खत्म करवाना चाहिए।

Girish Saini 

