सतत विकास और स्वस्थ समाज की आधारशिला है स्वच्छताः डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान

स्वच्छता अभियान को जन आंदोलन का रूप देने का आह्वान किया।

सतत विकास और स्वस्थ समाज की आधारशिला है स्वच्छताः डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान

नीलोखेड़ी, गिरीश सैनी। स्वच्छता केवल अभियान नहीं, बल्कि सतत विकास और स्वस्थ समाज की आधारशिला है, और कचरा प्रबंधन इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बनकर उभर रहा है। ये विचार हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान ने संस्थान में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन विषय पर आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। कार्यक्रम समन्वयक संदीप भारद्वाज ने डॉ. चौहान का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया।

डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को कचरा प्रबंधन की वैज्ञानिक तकनीकों, आधुनिक पद्धतियों और व्यावहारिक उपायों की गहन जानकारी प्राप्त होती है, जो उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में प्रभावी रूप से लागू करने में सक्षम बनाती है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण में सीखी गई बातों को जमीनी स्तर पर उतारने से ही वास्तविक बदलाव दिखाई देता है। ये कार्यक्रम न केवल स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और जन स्वास्थ्य को सुदृढ़ करने की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार करता है। उन्होंने प्रतिभागियों से आह्वान किया कि वे इस प्रशिक्षण को एक अवसर के रूप में लें और अपने गांवों को स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ बनाने के लिए नेतृत्वकारी भूमिका निभाएं।

निदेशक डॉ चौहान ने बताया कि देश में प्रतिदिन लगभग 5600 टन कचरा उत्पन्न होता है, जो एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। यदि इस कचरे का सही तरीके से प्रबंधन न किया जाए तो यह पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए खतरा बन सकता है। इसलिए सभी को मिलकर इस दिशा में ठोस प्रयास करने की आवश्यकता है।

उन्होंने प्रतिभागियों से कहा कि वे केवल समस्याओं को देखने तक सीमित न रहें, बल्कि उनके समाधान भी खोजें। सबसे पहले समस्याओं को पहचान कर उनका विश्लेषण करें और उसके बाद व्यवहारिक सुझावों के माध्यम से कचरे रूपी इस समस्या को समाप्त करें।

उन्होंने प्रतिभागियों को अपने दैनंदिन कार्यों में हिंदी भाषा का अधिक से अधिक प्रयोग करने का संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण, संवाद और प्रशासनिक कार्यों में हिंदी का प्रयोग बढ़ाने से कार्य की प्रभावशीलता भी बढ़ती है।

संकाय सदस्य डॉ. सुशील मेहता ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ जनजागरूकता भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने प्रतिभागियों से अपील की कि वे अपने क्षेत्रों में जागरूकता फैलाकर स्वच्छता अभियान को जन आंदोलन का रूप दें।

कार्यक्रम समन्वयक संदीप भारद्वाज ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रतिभागियों को व्यवहारिक ज्ञान प्रदान करते हैं, जिससे वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्वच्छता अभियानों को प्रभावी ढंग से लागू कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि संस्थान का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि प्रतिभागियों को परिवर्तन का वाहक बनाना है।

अंत में डॉ. चौहान ने सभी प्रतिभागियों एवं उपस्थित जन को आगामी 19 मार्च को मनाए जाने वाले भारतीय नव वर्ष की शुभकामनाएं दीं और सभी के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस दौरान संकाय सदस्य डॉ. सुशील मेहता, पिंकी यादव (डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम मैनेजर, गुरुग्राम), भावना शर्मा (सलाहकार, एसआईडब्ल्यूएम), फ़ाशिह हमद (कोऑर्डिनेटर) सहित अन्य गणमान्य जन व प्रतिभागी मौजूद रहे।