बढ़ता कार्बन फुटप्रिंट पर्यावरण के लिए खतरा, ग्रीन इकोनॉमी ही समाधानः प्रो. सुदेश यादव
रोहतक, गिरीश सैनी। एमडीयू के अर्थशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित 10 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के बदलते संबंधों पर विशेषज्ञों ने विचार रखे।
कार्बन इकोनॉमीः आवश्यकता, चुनौतियां और हमारे प्रयास विषयक कार्यशाला में जवाहरलाल नेहरू विवि, नई दिल्ली के स्कूल ऑफ एनवायरमेंटल साइंसेज के प्रो. सुदेश यादव ने बतौर मुख्य वक्ता कहा कि औद्योगिक विकास के साथ बढ़ता कार्बन उत्सर्जन, ग्रीनहाउस गैसों का असंतुलन और जलवायु परिवर्तन गंभीर वैश्विक चुनौती बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए ग्रीन इकोनॉमी को बढ़ावा देना समय की जरूरत है।
उन्होंने बताया कि कार्बन जीवन चक्र के लिए आवश्यक तत्व है, लेकिन वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड का लगातार बढ़ता स्तर मौसम चक्र में बदलाव और ग्लोबल वार्मिंग को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने प्रतिभागियों को कार्बन फुटप्रिंट की अवधारणा समझाते हुए कहा कि अत्यधिक बिजली खपत, वाहनों से निकलने वाला धुआं और प्लास्टिक कचरा इसके प्रमुख कारण हैं।
प्रो. यादव ने पार्टिक्युलेट मैटर, वायु प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग के संबंध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो पर्यावरण पर इसके गंभीर दुष्परिणाम होंगे।

Girish Saini 

