शोध से बनेगी सतत और समावेशी हरियाणा की राह
रोहतक, गिरीश सैनी। एमडीयू के अर्थशास्त्र विभाग द्वारा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के प्रायोजन में आयोजित 10 दिवसीय शोध पद्धति पाठ्यक्रम शुक्रवार को संपन्न हुआ। इंडियाज ग्रीन इकॉनमी ट्रांजीशन एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट: कॉन्सेप्ट्स, टूल्स एंड पॉलिसी एप्लीकेशन्स विषयक पाठ्यक्रम में शोध पद्धतियों, डेटा विश्लेषण और सतत विकास से जुड़े पहलुओं पर विशेषज्ञों ने प्रशिक्षण दिया।
समापन समारोह में हरियाणा सरकार के विदेश सहयोग विभाग में मुख्यमंत्री के सलाहकार पवन के. चौधरी मुख्य अतिथि रहे। बिल्डिंग अ सस्टेनेबल एंड इंक्लूसिव हरियाणा विषय पर उन्होंने विकास के लिए शोध एवं आंकड़ा आधारित नीति निर्माण की भूमिका रेखांकित की। उन्होंने विकसित हरियाणा@2047 के लक्ष्य की दिशा में शोध को प्रभावी माध्यम बताते हुए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
एमडीयू कुलसचिव प्रो. संदीप बंसल ने प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए शोध कौशल को आगामी कार्यों में उपयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बदलते दौर में शोधार्थियों के लिए आधुनिक शोध पद्धतियों, डेटा विश्लेषण और तकनीकी संसाधनों की समझ जरूरी है।
अंतिम सत्र में जेएनयू, नई दिल्ली के प्रो. एलुमलाई कन्नन ने शोध डिजाइन, मात्रात्मक, गुणात्मक एवं मिश्रित शोध पद्धतियों तथा समग्र सूचकांक निर्माण की जानकारी दी। पाठ्यक्रम में साहित्य समीक्षा, सांख्यिकीय तकनीक, पर्यावरणीय मूल्यांकन, डिजिटल शोध संसाधन और शोध लेखन सहित विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया गया। कोर्स डायरेक्टर प्रो. रामफूल ओहल्याण ने स्वागत किया। आयोजन सचिव डॉ. कोमल मलिक ने कोर्स की रिपोर्ट प्रस्तुत की और आभार जताया।

Girish Saini 

