दोआबा कॉलेज में पंजाब में उच्च शिक्षा तथा एनईपी की चुनौतियों पर राष्ट्रीय सैमीनार आयोजन
दोआबा कॉलेज के पोस्ट ग्रैजुएट पॉलिटिकल साईंस विभाग द्वारा इण्डियन कांऊसिल फॉर सोशल साईंस रिसर्च (ICSSR) नॉर्थ वैसर्टन रीज़न चण्डीगढ़ के सहयोग से पंजाब में उच्च शिक्षा तथा एनईपी की चुनौतियों विषय पर राष्ट्रीय सैमीनार का आयोजन किया गया ।
जालन्धर, 28 मार्च, 2026: दोआबा कॉलेज के पोस्ट ग्रैजुएट पॉलिटिकल साईंस विभाग द्वारा इण्डियन कांऊसिल फॉर सोशल साईंस रिसर्च (ICSSR) नॉर्थ वैसर्टन रीज़न चण्डीगढ़ के सहयोग से पंजाब में उच्च शिक्षा तथा एनईपी की चुनौतियों विषय पर राष्ट्रीय सैमीनार का आयोजन किया गया ।
डॉ. शालिनी बहल- कंट्रोलर एग्जामस जीएनडीयू बतौर मुख्य वक्ता, डॉ. जगरूप सिंह सेखों- सेवानिवृत्त प्रोफेसर राजनीति शास्त्र विभाग, जीएनडीयू, डॉ. रीतू भट्टी- डिप्टी रजिस्ट्रार, जीएनडीयू बतौर वक्ता उपस्थित हुए जिनका हार्दिक अभिनन्दन प्रि. डॉ. प्रदीप भंडारी, डॉ. निर्मल सिंह- सैमीनार संयोजक , डॉ. विनय गिरोत्रा-विभागाध्यक्ष, डॉ. रणजीत सिंह व प्राध्यापकों ने किया ।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं दोआबा जय गान के साथ हुआ । प्रि. डॉ. प्रदीप भण्डारी ने अपने सम्बोधन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के कार्यान्वयन और इसके पंजाब के उच्च शिक्षा पर प्रभाव के संदर्भ में इस सेमिनार के महत्व को रेखांकित किया ।
मुख्य वक्तव्य डॉ. शालिनी बहल ने पंजाब के उच्च शिक्षा तंत्र में एनईपी 2020 के कार्यान्वयन पर गहन विचार प्रस्तुत किए । उन्होंने भारत में शिक्षा नीति के विकास को “पहुंच से विस्तार और फिर परिवर्तन” तक की यात्रा के रूप में बखूबी समझाया । उन्होंने एनईपी 2020 के दृष्टिकोण—समग्र एवं बहुविषयक शिक्षा, लचीला पाठ्यक्रम, बहुभाषिकता, प्रारंभिक बाल्य शिक्षा, सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, वैश्विक प्रतिस्पर्धा, समानता एवं समावेशन—पर प्रकाश डाला । डॉ. बहल ने पंजाब में एनईपी 2020 के कार्यान्वयन से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों पर भी चर्चा की, जैसे कि संरचनात्मक बदलाव (संलग्नता से स्वायत्तता की ओर संक्रमण), शैक्षणिक चुनौतियाँ (फैकल्टी की तैयारी एवं पाठ्यक्रम निर्माण), प्रशासनिक एवं शासन संबंधी मुद्दे, वित्तीय एवं डिजिटल सीमाएँ तथा गुणवत्ता से जुड़ी समस्याएँ । उन्होंने हितधारकों—सरकार, संस्थान, शिक्षक एवं विद्यार्थियों—की भूमिकाओं का भी विश्लेषण किया । समाधान के रूप में उन्होंने फैकल्टी प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण कार्यक्रमों तथा चरणबद्ध एवं संदर्भ-आधारित कार्यान्वयन पर भी बल दिया।
डॉ. जगरूप सिंह सेखों ने एनईपी के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु सरकार एवं संस्थानों के बीच सहयोगात्मक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया । उन्होंने पंजाब में नीतियों के असमान क्रियान्वयन की ओर संकेत करते हुए आधुनिक प्रणालियों को बिना सोचे-समझे अपनाने के प्रति सावधानी बरतने की सलाह दी।
डॉ. रीतू भट्टी ने अपना शोध पत्र पढ़ते हुए एनईपी-2020 के बदलते परिवेश में भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व पर चर्चा की ।
इसके पश्चात तकनीकी सत्र आयोजित किया गया, जिसकी अध्यक्षता डॉ. जगरूप सिंह सेखों ने की। इस सत्र में विभिन्न संस्थानों के शिक्षाविदों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए, जिनमें एनईपी के विभिन्न आयामों एवं उसके व्यावहारिक प्रभावों पर चर्चा की गई। इस सत्र में शिक्षकों एवं विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
पहले टैक्निकल सैशन में उपरोक्त विषय पर भाग लेने वाले प्राध्यापको ने अपने शोध पत्र पढ़े । पहले टैक्निकल सैशन के समाप्ति के उपरांत प्रि. डॉ. प्रदीप भण्डारी व विभाग के प्राध्यापकों ने डॉ. शालिनी बहल, डॉ. जगरूप सिंह सेखों व डॉ. रीतू भट्टी को सम्मान चिह्न देकर सम्मानित किया गया। डॉ. विनय गिरोत्रा ने धन्यवाद ज्ञापन दिया ।
वैलेडिक्टरी सैशन में डॉ. अमित कौट्स- प्रोफेसर ऐजुकेशन विभाग, जीएनडीयू बतौर मुख्य वक्ता उपस्थित हुए जिन्होंने सैमीनार की मुख्य चर्चाओं का सार प्रस्तुत किया । सभी प्रतिभागियों को उनके योगदान के लिए प्रमाण पत्र वितरित किए गए ।
कार्यक्रम का समापन डॉ. निर्मल सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ ।
दोआबा कॉलेज में आयोजित राष्ट्रीय सैमीनार में उपस्थिति को सम्बोधित करते हुए डॉ. शालिनी बहल, डॉ. जगरूप सिंह सेखों, डॉ. रीतू भट्टी एवं डॉ. अमित कौट्स ।

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