विकास योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन भी आवश्यकः डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान
तीस दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू।
नीलोखेड़ी, गिरीश सैनी। विकास योजनाओं की सफलता केवल उनके निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी सतत निगरानी और मूल्यांकन भी उतना ही आवश्यक है। सामाजिक अंकेक्षण इस दिशा में एक प्रभावी उपकरण के रूप में कार्य करता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि संसाधनों का उपयोग सही तरीके से हो और उसका लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंचे। इससे न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगता है, बल्कि जनविश्वास भी मजबूत होता है। ये विचार हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान ने सामाजिक अंकेक्षण विषय पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को सामाजिक अंकेक्षण की प्रक्रियाओं, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के सिद्धांतों से अवगत कराना है, ताकि वे जमीनी स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में योगदान दे सकें।
डॉ. चौहान ने कहा कि सामाजिक अंकेक्षण लोकतांत्रिक व्यवस्था का एक सशक्त स्तंभ है, जो न केवल योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करता है, बल्कि आमजन को शासन की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी का अवसर भी प्रदान करता है। जब समाज स्वयं अपने विकास कार्यों का मूल्यांकन करता है, तब योजनाओं की गुणवत्ता और प्रभावशीलता स्वतः ही बढ़ जाती है, जिससे एक उत्तरदायी और सशक्त शासन प्रणाली का निर्माण होता है।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं होता, बल्कि प्रतिभागियों में जिम्मेदारी और नेतृत्व क्षमता का विकास करना भी होता है। इस तीस दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को जो अनुभव और जानकारी प्राप्त होगी, वह उन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में सामाजिक अंकेक्षण को प्रभावी ढंग से लागू करने में सक्षम बनाएगी और वे ग्रामीण विकास की प्रक्रिया में एक सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनेंगे।
कार्यक्रम के लीड कोर्स कॉर्डिनेटर विश्वनाथ सिंह ने कहा कि ये प्रशिक्षण कार्यक्रम इस प्रकार संरचित किया गया है कि प्रतिभागियों को सामाजिक अंकेक्षण की संपूर्ण प्रक्रिया - योजना की समझ, दस्तावेज के विश्लेषण, फील्ड विजिट और जनसुनवाई तक - का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हो। हमारा प्रयास है कि प्रतिभागी न केवल सिद्धांतों को समझें, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू करने में भी पूर्णतः सक्षम बनें, ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत कर सकें।
कार्यक्रम का समन्वयन संस्थान के सहायक आचार्य डॉ. वजीर सिंह दुहन द्वारा किया जा रहा है। इस दौरान संस्थान के संकाय सदस्य डॉ. सुशील मेहता, संदीप भारद्वाज तथा राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान से वरिष्ठ सलाहकार गुरबिंदर सिंह भी मौजूद रहे।

Girish Saini 

