नीलोखेड़ी में दृषद्वती घाट विकसित करने को लेकर सरस्वती बोर्ड और एचआरडीआई के दल ने किया दौरा

प्राचीन सरस्वती नदी को पुनः धरातल पर पुनर्जीवित करने के अभियान में जुटा हरियाणा सरस्वती विरासत विकास बोर्ड अब शास्त्रों में सरस्वती की प्रमुख सहयोगी नदी के रूप में वर्णित दृषद्वती के अवशेषों के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में भी कार्य करेगा।

नीलोखेड़ी में दृषद्वती घाट विकसित करने को लेकर सरस्वती बोर्ड और एचआरडीआई के दल ने किया दौरा

नीलोखेड़ी, गिरीश सैनी। प्राचीन सरस्वती नदी को पुनः धरातल पर पुनर्जीवित करने के अभियान में जुटा हरियाणा सरस्वती विरासत विकास बोर्ड अब शास्त्रों में सरस्वती की प्रमुख सहयोगी नदी के रूप में वर्णित दृषद्वती के अवशेषों के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में भी कार्य करेगा।

हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान (एचआरडीआई) के निमंत्रण पर हरियाणा सरस्वती विरासत विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष धुम्मन सिंह किरमच ने एचआरडीआई के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान के साथ प्राचीन दृषद्वती के वर्तमान स्वरूप मानी जाने वाली चौतांग (चतंग/चेतंग) नदी के विभिन्न स्थलों का दौरा किया। हिमालय क्षेत्र से निकलने वाली ये बरसाती नदी करनाल जिले के नीलोखेड़ी, तरावड़ी और निसिंग क्षेत्रों से होकर गुजरती रही है।

इस दौरान इन्द्री क्षेत्र के कलसी गांव में स्थित उस स्थान का भी निरीक्षण किया गया, जिसे स्थानीय परंपराओं में राक्षी और दृषद्वती के संगम स्थल के रूप में जाना जाता है। निरीक्षण के उपरांत धुम्मन सिंह किरमच और डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि ग्रामीण लोककथाओं और ऐतिहासिक संदर्भों में चौतांग, चतंग अथवा चेतंग नाम से विद्यमान यह बरसाती धारा वस्तुतः प्राचीन दृषद्वती नदी का ही अवशेष स्वरूप प्रतीत होती है।

उन्होंने बताया कि नीलोखेड़ी नगर से होकर गुजरने वाले चौतांग नदी के हिस्से का व्यापक कायाकल्प कर उसे दृषद्वती घाट के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इस परियोजना के माध्यम से न केवल क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित किया जा सकेगा, बल्कि इसे पर्यटन एवं जन-जागरूकता का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी बनाया जा सकेगा।

धुम्मन सिंह किरमच और डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि इस कार्य को हरियाणा सरस्वती विरासत विकास बोर्ड, नगर पालिका नीलोखेड़ी तथा सिंचाई विभाग के संयुक्त सहयोग से आगे बढ़ाया जा सकता है। इस संबंध में नीलोखेड़ी के विधायक भगवानदास कबीरपंथी के साथ भी प्रारंभिक स्तर पर चर्चा की गई है और प्रस्ताव को सकारात्मक समर्थन प्राप्त हुआ है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरस्वती के साथ-साथ दृषद्वती जैसी ऐतिहासिक नदियों के संरक्षण से हरियाणा की वैदिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को नई पहचान मिलेगी तथा आने वाली पीढ़ियों को अपने गौरवशाली अतीत से जोड़ा जा सकेगा।