वन्दे मातरम् एवं साहित्य संगोष्ठी का सार्थक आयोजन

वन्दे मातरम् एवं साहित्य संगोष्ठी का सार्थक आयोजन

जालंधर, 20 सितम्बर 2026: अखिल भारतीय साहित्य परिषद्, पंजाब की जालंधर इकाई के तत्वावधान में ‘वन्दे मातरम् एवं साहित्य संगोष्ठी’ का आयोजन प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ. अजय शर्मा के निवास, जालंधर कुंज में किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर के हिन्दी विभागाध्यक्ष एवं डीन, भाषाएँ, प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार ने की। कार्यक्रम में साहित्यकारों, शिक्षाविदों, पत्रकारों एवं साहित्यप्रेमियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। संगोष्ठी में भारतीय ज्ञान-परम्परा, वन्दे मातरम्, साहित्य, समाज एवं राष्ट्र-चेतना तथा ‘आत्मबोध से विश्वबोध’ जैसे महत्वपूर्ण एवं समकालीन विषयों पर सार्थक और विचारोत्तेजक चर्चा हुई। वक्ताओं ने साहित्य को भारतीय सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय अस्मिता और सामाजिक सरोकारों से जोड़ते हुए उसके व्यापक दायित्व पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. डॉ. सुनील कुमार ने ‘वन्दे मातरम्’ की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, उसकी विकास-यात्रा तथा भारतीय राष्ट्रीय चेतना में उसके महत्त्व पर अत्यंत प्रभावशाली एवं ज्ञानवर्धक वक्तव्य दिया। उन्होंने वन्दे मातरम् को केवल एक गीत न मानकर भारतीय स्वतंत्रता चेतना, सांस्कृतिक अस्मिता और राष्ट्रभावना के महत्वपूर्ण प्रतीक के रूप में रेखांकित किया।
प्रोफ़ेसर रेखा कालिया भारद्वाज ने विद्या भारती के उद्देश्यों एवं उसकी शैक्षिक-सांस्कृतिक भूमिका पर प्रकाश डाला। सरला भारद्वाज ने संस्कृत साहित्य की समृद्ध परम्परा और उसमें निहित राष्ट्र-चेतना को रेखांकित किया। वीणा विज ने वन्दे मातरम् की भावभूमि और उसके अंतर्निहित राष्ट्रप्रेम के भाव को प्रभावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। वरिष्ठ आलोचक तरसेम गुजराल तथा साहित्यकार एवं पत्रकार सिमर सदोष ने अपने साहित्यिक अनुभवों को साझा करते हुए राष्ट्रीय साहित्य की भावभूमि तथा साहित्य और समाज के पारस्परिक संबंध पर विचार रखे। उन्होंने साहित्य को समाज की संवेदनाओं और राष्ट्रीय जीवन-मूल्यों का सशक्त माध्यम बताया। संगोष्ठी में डॉ.प्रिंसीपल ज्योति शर्मा,  डॉ नीलू शर्मा, डॉ. दीपक शर्मा,  ज्योति गोगिया, रमण शर्मा, दीलीप पाण्डेय तथा रितेश जी ने भी सक्रिय सहभागिता करते हुए विभिन्न विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। संवाद की इस प्रक्रिया ने संगोष्ठी को बहुआयामी और विचारसमृद्ध बनाया।
इस अवसर पर अमृतसर से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के संयोजक मुकेश जी ने परिषद् के उद्देश्यों, विभिन्न गतिविधियों तथा भावी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने युवा पीढ़ी को भारतीय ज्ञान-परम्परा, संस्कृति, साहित्य एवं राष्ट्रबोध से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम का सफल एवं प्रभावपूर्ण संचालन डॉ. विनोद कुमार शर्मा ने किया। समग्र रूप से यह आयोजन भारतीय ज्ञान-परम्परा, साहित्यिक चेतना, राष्ट्रीय भावबोध और सामाजिक सरोकारों को एक साझा विमर्श में जोड़ने वाला अत्यंत सार्थक एवं सफल कार्यक्रम रहा। संगोष्ठी ने साहित्य के माध्यम से आत्मबोध से विश्वबोध की यात्रा तथा राष्ट्र-चेतना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सकारात्मक और प्रेरणादायी संवाद स्थापित किया।