कुलपति व कुलसचिव की तकरार का अखाड़ा बना एमडीयू

महामहिम राज्यपाल ने नाटकीय घटनाक्रम में वीसी द्वारा निलंबित कुलसचिव को किया बहाल।

कुलपति व कुलसचिव की तकरार का अखाड़ा बना एमडीयू

कुलपति के खिलाफ गूंजे नारे, दो धड़ों में बंटे कर्मचारी।

रोहतक, गिरीश सैनी। एमडीयू, रोहतक एक बार फिर से कुलपति प्रो. राजबीर सिंह व कुलसचिव डॉ. कृष्ण कांत के बीच घमासान को लेकर सुर्खियों में है। कार्यकारी परिषद (ईसी) की बैठक को लेकर विवि के दोनों आला अधिकारी इस बार आमने-सामने हैं।

सूत्रों के अनुसार, हरियाणा सरकार के पत्र (KW 15/2-2026 UNP-4) में पहले ही 302वीं कार्यकारी परिषद बैठक को लेकर विवि को फटकार लगाई जा चुकी थी। शिक्षा विभाग ने कार्यकारी परिषद की 302वीं बैठक को पुनर्निर्धारित करने की सलाह दी थी। इसके बावजूद यह बैठक आयोजित की गई। सरकार ने संज्ञान लेते हुए निर्देश दिए कि इस मामले में सरकार की ओर से निर्णय लिए जाने तक कोई नियुक्ति आदेश जारी न किए जाएं या किसी नए व्यक्ति को शामिल न होने दें। स्पष्ट निर्देशों के बावजूद नियुक्ति पत्र जारी कर दिए गए। यह सरकार के निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है।

इसी पृष्ठभूमि में यह विवाद और गहरा गया। कार्यकारी परिषद की 304वीं बैठक 18 फरवरी को आहुत की गई। सरकार के निर्देशों के तहत कुलसचिव की ओर से बैठक स्थगित करने संबंधी ईमेल भेजी गई थी। इस पर कुलपति ने आपत्ति जताते हुए सभी सदस्यों को निर्धारित बैठक में शामिल होने के निर्देश जारी किए। हरियाणा के एसीएस की ओर से जारी पत्र के बाद ईसी की बैठक नहीं होने की बात कहने पर कुलपति प्रो. राजबीर सिंह ने मंगलवार को अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए कुलसचिव कृष्णकांत को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। उनकी जगह फार्मेसी विभाग के प्रो. हरीश दुरेजा को नया कुलसचिव नियुक्त किया गया, ताकि 304वीं कार्यकारी परिषद की बैठक आयोजित की जा सके। कुलपति का पक्ष था कि प्रशासनिक कार्य बाधित नहीं होने चाहिए और बैठक नियत समय पर होना आवश्यक था।

वहीं, दूसरी ओर, डॉ. कृष्णकांत ने अपने निलंबन को पूरी तरह अवैध बताया। उनका कहना था कि उनकी नियुक्ति राज्यपाल (कुलाधिपति) की मंजूरी से हुई है, ऐसे में कुलपति को उन्हें निलंबित करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये कदम हरियाणा सरकार के निर्देशों और विवि अधिनियम की अवहेलना है। उनके अनुसार, वे सरकार के निर्देशों का पालन कर रहे थे, इसके बावजूद उन्हें निशाना बनाया गया। उन्होंने यह भी कहा कि कुलसचिव पद पर नई नियुक्ति नियमों के विरुद्ध है, जिससे प्रस्तावित बैठक की वैधता पर सवाल उठ सकते हैं और उसमें लिए गए किसी भी निर्णय को कानूनी चुनौती मिल सकती है।

बुधवार को इस प्रशासनिक विवाद ने नाटकीय मोड़ ले लिया। कुलपति प्रो. राजबीर सिंह द्वारा बुलाई गई 304वीं कार्यकारी परिषद (ईसी) की बैठक पर राज्यपाल कार्यालय ने सख्त आपत्ति जताते हुए इसे अगले आदेश तक स्थगित करने के निर्देश दिए। इन आदेशों के बाद कुलपति ने बैठक स्थगित कर दी।

राज्यपाल कार्यालय की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि 18 फरवरी को प्रस्तावित 304वीं कार्यकारिणी बैठक, दिनांक 17.02.2026 के पत्र के माध्यम से जारी सरकारी निर्देशों का उल्लंघन है। इस पर संज्ञान लेते हुए राज्यपाल (कुलाधिपति) ने बैठक को स्थगित करने का आदेश दिया है।

एक अन्य आदेश (क्रमांक एचएलबी-जीएस-2026/1393) के तहत राज्यपाल-कुलाधिपति ने कुलसचिव डॉ. कृष्णकांत के निलंबन आदेश (दिनांक 17.02.2026) को रद्द करते हुए उन्हें तत्काल बहाल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि कुलपति द्वारा भविष्य में कोई भी कार्रवाई कुलाधिपति की पूर्व स्वीकृति के बिना नहीं की जाएगी।

गौरतलब है कि कुलपति प्रो. राजबीर सिंह का कार्यकाल 20 फरवरी को पूरा हो रहा है। हालिया घटनाक्रम के बाद विवि परिसर में चर्चाओं और अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। इसी बैठक को लेकर विवि के शिक्षक संघ, गैर-शिक्षक कर्मचारी संगठन और छात्र समूह भी दो खेमों में बंटे नजर आए।

निदेशक जनसंपर्क प्रो. आशीष दहिया द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि महर्षि दयानंद विवि, रोहतक की कार्यकारी परिषद (ईसी) की आज निर्धारित बैठक स्थगित कर दी गई है। विवि अधिनियम एवं परिनियमों के अनुरूप आयोजित की जा रही कार्यकारी परिषद की 304वीं बैठक आज विवि सचिवालय स्थित कुलपति समिति कक्ष में आहूत की गई थी। बैठक प्रारंभ हो चुकी थी, किंतु राज्यपाल-कुलाधिपति से प्राप्त निर्देशों के अनुसार कार्यकारी परिषद की बैठक को स्थगित घोषित किया गया।

वहीं, जब कुलपति प्रो. राजबीर सिंह जब बैठक के लिए पहुंचे तो शिक्षक व गैर शिक्षक कर्मचारियों ने कार्यकारी परिषद (ईसी) के खिलाफ नारेबाजी कर विरोध जताया। कर्मचारी एकता जिंदाबाद के नारों से गूंजते विवि परिसर में शिक्षक व गैरशिक्षक कर्मी पदोन्नति व ईसी की बैठक को लेकर दो फाड़ नजर आए। शिक्षकों के एक गुट ने वीसी मुर्दाबाद के नारे लगाते हुए बैठक स्थगित करने की मांग की। वहीं, दूसरा गुट बैठक के समर्थन में नारे लगा रहा था। ईसी के पक्ष में आए शिक्षकों का कहना था कि विवि के लगभग 100 शिक्षकों की पदोन्नति पिछले कई वर्षो से अटकी हुई है। ईसी की ये बैठक नहीं हुई तो ये पदोन्नति रुक जाएगी, इसलिए ईसी की बैठक बहुत जरूरी है।