काश मैं तुम्हारी... होती

काश मैं तुम्हारी... होती

काश मैं तुम्हारी होती,
तो शायद मुझे कभी 
यह नहीं कहना पड़ता
कि मैं तुमसे 
कितना प्यार करती हूं।
तुम मेरी आंखों में 
पढ़ लेते वो सब, 
जो मेरे होंठ 
कभी नहीं कह पाते।

मैं तुम्हारी सुबह की 
पहली दुआ होती,
और रात की 
आखिरी राहत।
तुम्हारी मुस्कान की वजह,
और हर दर्द का 
आधा हिस्सा।

काश मैं तुम्हारी... होती,
तो तुम्हारी उंगलियों में 
मेरा हाथ नहीं,
मेरा पूरा भरोसा होता।
तुम्हारे कंधे पर सिर रखकर
मैं सारी दुनिया से 
बेखौफ हो जाती।

मैं तुम्हारे लिए 
कोई आदत नहीं 
बनना चाहती थी,
मैं तुम्हारी जिंदगी का 
वह एहसास 
बनना चाहती थी
जिसके बिना 
हर खुशी अधूरी लगे।

जब तुम थककर लौटते,
मैं तुम्हारी 
खामोशी पढ़ लेती।
जब तुम मुस्कुराते,
मैं उस मुस्कान में 
छिपी हर बात समझ लेती।
और जब तुम टूटते,
तो तुम्हें दुनिया से नहीं,
तुम्हें तुमसे भी 
हारने नहीं देती।

काश मैं तुम्हारी... होती,
तो तुम्हारे नाम के साथ
अपनी हर दुआ जोड़ देती।
तुम्हारी हर जीत पर 
सजदा करती,
और तुम्हारे 
हर आंसू को
अपनी पलकों में 
छिपा लेती।

तुम जानते हो...

मोहब्बत का 
सबसे बड़ा दुख 
जुदाई नहीं होता,
बल्कि सबसे बड़ा दुख 
यह होता है कि,
कोई दिल में 
पूरी तरह बस जाए,
मगर तकदीर में 
कभी अपना न हो।

फिर भी,
अगर कभी 
तुम्हें मेरी याद आए,
तो आसमान की तरफ 
देख लेना।
क्योंकि हो सकता है
वहीं कहीं मेरी कोई दुआ
अब भी तुम्हारे लिए 
रोशनी बनकर ठहरी हो।

मैंने तुम्हें पाने से अधिक,
तुम्हें खुश देखने की 
दुआ की है।
और अगर इस जन्म में
तुम्हारे नाम के साथ 
मेरा नाम नहीं लिखा,
तो मेरी एक ही प्रार्थना रहेगी—
अगले हर जन्म में,
हर दुआ में,
हर सांस में,
हर कहानी में...
मैं सिर्फ तुम्हारी होऊं।
क्योंकि
मोहब्बत का अंत सिर्फ 
एक पंक्ति पर होता है—
काश मैं तुम्हारी... होती।"
टी शशिरंजन