हरियाणा की माटी से / महाराष्ट्र : थोड़े अगाड़ी, थोड़े पिछाड़ी 

हरियाणा की माटी से / महाराष्ट्र : थोड़े अगाड़ी, थोड़े पिछाड़ी 
कमलेश भारतीय।

-*कमलेश भारतीय 
सचमुच राष्ट्र से बड़ा है महाराष्ट्र! कितना खेला हो गया और चाणक्य शरद पवार जान ही न पाये । उनके पांव के नीचे से जमीन खिसक गयी उन्हें कुछ भी पता ही न चला ! वे तो भतीजे अजीत पवार को सबक सिखाने चले थे , भतीजे ने प्रफुल्ल पटेल के साथ मिलकर चाचा को ही सबक सिखा दिया और एक बार फिर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बन गये । पहली बार भी कुछ दिनों के लिये उपमुख्यमंत्री बने थे । अब इन दोनों बागी नेताओं का दावा है कि एनसीपी के 53 में से चालीस विधायक उनके साथ हैं ! यह भी दावा ठोक दिया कि असली पार्टी उनके पास है । यानी जल्द ही यहां शिवसेना जैसा खेल भी होने वाला है । पहले शिवसेना , कांग्रेस और एनसीपी की अघाड़ी सरकार तोड़कर और फिर शिवसेना भी उद्धव ठाकरे से छीन कर एकनाथ शिंदे को दे दी । अब यही खेल शरद पवार के साथ भी होगा कि अजीत पवार को ही असली एनसीपी चीफ बनवा दिया जायेगा । अब न रहेगा बांस और न बनेगी अघाड़ी की बांसुरी ! 
एक समय भाजपा शिवसेना गठबंधन चलता था और भाजपा अपना मुख्यमंत्री बना लेती थी । फिर शिवसेना ने आधे आधे समय के राज की बात कही तो भाजपा नहीं मानी । इस तरह शरद पवार ने कांग्रेस और एनसीपी की अघाड़ी सरकार बनवा दी जो भाजपा के चाणक्य अमित शाह को बिल्कुल भी पसंद नहीं आई । आखिरकार अढ़ाई साल बाद एकनाथ शिंदे से विद्रोह करवा कर अपनी सरकार ही नहीं बना ली बल्कि शिंदे को ही असली शिवसेना का अधिकारी बनवा दिया । इस तरह धनुष-बाण से भी गये उद्धव ! अब यही खेल एनसीपी के साथ होने जा रहा है । अजित पवार को उपमुख्यमंत्री बना दिया गया है और प्रफुल्ल पटेल को केंद्र में लिये जाने की चर्चायें शुरू हो गयी हैं । लगता है प्रफुल्ल पटेल भी कांग्रेस नेताओं ज्योतिरादित्य सिंधिया और जतिन की तरह पद के बिना जी नहीं सकते । इसलिये पाला बदलकर भाजपा के साथ जा मिले ! यह सब कुछ बहुत जल्दी में नहीं हुआ । आप्रेशन लोट्स चल रहा था चुपके चुपके ! दो दल मिल रहे थे चुपके चुपके ! शरद पवार और उद्धव ठाकरे को खबर ही न हुई कि क्या होने जा रहा है ! अब महाराष्ट्र में लोकसभा चुनाव में नये समीकरण सामने आयेंगे ! पुराने परम्परागत समीकरण टूट गये हैं या तोड़ दिये गये हैं । आप्रेशन लोट्स की बधाई जिसने देश को दलबदल की अनोखी राह दिखाई जो आने वाले दिनों में और लोकप्रिय होती जायेगी ! दिल थाम कर बैठिए ! नये से नये दृश्य देखने को मिलेंगे ! यहां कौन है तेरा , मुसाफिर जायेगा कहां ! कोई दम लेने को तैयार नहीं ! सब भागते जा रहे हैं पदों के पीछे ! कहां से कहां आ गयी राजनीति ! अटल बिहारी वाजपेयी एक वोट खरीदकर सरकार बचाने को  तैयार न हुए अब वही भाजपा थोक मे विधायक खरीदकर सरकार पलट देती है ! है न अजब गजब ! 
कुछ न कुछ मजबूरियां रही होंगीं
यूं ही कोई बेवफा नहीं होता ! 
-*पूर्व उपाध्यक्ष, हरियाणा ग्रंथ अकादमी ।