एफटीवी के 2018 बैच के विद्यार्थियों के कार्य की जांच के लिए जूरी प्रारंभ

कुलपति डॉ. अमित आर्य ने पूरे कराए लंबित फिल्म प्रोजेक्ट्स।

एफटीवी के 2018 बैच के विद्यार्थियों के कार्य की जांच के लिए जूरी प्रारंभ

रोहतक, गिरीश सैनी। दादा लख्मी चंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विवि (डीएलसी सुपवा), रोहतक के फिल्म एंड टेलीविजन (एफटीवी) फैकल्टी के 2018 बैच की पढ़ाई पूरी होने का रास्ता साफ हो गया। इन छात्रों द्वारा किए गए कार्य को देखने व जांचने के लिए जूरी शुरू हो चुकी है।

कुलपति डॉ अमित आर्य ने व्यक्तिगत दिलचस्पी लेते हुए छात्रों के लंबित फिल्म प्रोजेक्ट्स पूरे कराए, जिसके कारण पूरा बैच अपनी पढ़ाई पूरी करने के आखिरी पड़ाव पर पहुंच गया है। एफसी महेश टीपी ने बताया कि 2018 बैच की जूरी शुरू होना वास्तव में एक बड़ी उपलब्धि है। ये बैच डिग्री प्रोजेक्ट्स के पूर्ण न होने के कारण काफी लेट चल रहा था। लेकिन, डॉ अमित आर्य ने कुलपति बनने के साथ ही इस बैच की पढ़ाई पूरी कराने को अपनी प्राथमिकता बनाया। कुलपति ने इन छात्रों के डिग्री प्रोजेक्ट्स पूर्ण कराने के लिए लगातार 100 दिन का इंडोर व आउटडोर शूट शेड्यूल कराया, जिससे बैच के करीब 45 छात्रों को सीधा फायदा हुआ। ये बैच जल्द से जल्द पास आउट हो, इसलिए शूट्स की डेली बेसिस पर रिपोर्ट तलब करते हुए कुलपति ने उनकी मॉनिटरिंग की।

कुलपति डॉ अमित आर्य ने बताया कि 2018 बैच की जूरी लेने के लिए बॉलीवुड के प्रसिद्ध सिनेमेटोग्राफर अत्तर सिंह सैनी आए हैं, जो फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट, पुणे के 1992 बैच के छात्र रहे हैं। इसी तरह फिल्म अभिनेत्री नैना सरीन भी मुंबई से जूरी लेने आई हैं, जो कई फिल्मों, वेब सीरीज व टीवी सीरियल में कार्य कर चुकी हैं। कुलपति ने बताया कि ब्लर, डार्क माई ब्रदर, दाएं या बाएं आदि फिल्मों के निर्देशक शुभमॉय सेनगुप्ता, बीवी नंबर 1, बॉर्डर, चाची 420, खामोशी द म्यूजिकल, परदेश, फिजा, घातक आदि सुपरहिट फिल्मों के म्यूजिक रिकॉर्डिंग इंजीनियर प्रदीप राउत्रे और बर्लिन, माली, आईएम, चारूंगा, सॉरी भाई आदि फिल्मों का संपादन करने वाली आईरीन धर मलिक भी जूरी लेने के लिए विवि पहुंची हैं।

कुलपति डॉ आर्य ने बताया कि एफटीवी के इन लंबित प्रोजेक्ट्स में हुई देरी का असर विवि की शैक्षणिक व्यवस्था पर पड़ रहा था, इसलिए इन लंबित प्रोजेक्ट्स के समाधान के लिए उत्पादन प्रक्रिया का व्यापक पुनर्गठन किया गया, जिसमें अनुमोदन प्रक्रियाओं में तेजी, उपकरणों की समय पर उपलब्धता, बेहतर लॉजिस्टिक सहयोग और अतिरिक्त तकनीकी संसाधनों का इंतजाम किया गया। लगातार 100 दिन तक शूट चलाते हुए सभी डिग्री प्रोजेक्ट्स पूरे कराए गए, जिनके आकलन के लिए जूरी चल रही है।