एआई और कानून के तालमेल पर जीयू में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित
एआई के युग में संविधान की मूल भावना बनाए रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारीः डॉ. सुधीर जैन, पूर्व न्यायाधीश
गुरुग्राम, गिरीश सैनी। अदालत में संविधानः एआई के युग में आपराधिक, कॉर्पोरेट और सिविल कानूनों के आपसी तालमेल को समझना विषय पर गुरुग्राम विवि के विधि विभाग द्वारा पहली अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया, जिसमें देश-विदेश के विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की। इस दो दिवसीय सम्मेलन में आयोजित होने वाले कुल 8 तकनीकी सत्रों में विषय की गहनता और विभिन्न आयामों पर विस्तार से चर्चा होगी। सम्मेलन के दौरान 192 छात्रों एवं शोधार्थियों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। वहीं, देश - विदेश से कुल 226 शोधकर्ता, वरिष्ठ शिक्षाविद और विद्यार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
बतौर मुख्य अतिथि, दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश डॉ. सुधीर जैन ने शिरकत की। उन्होंने कहा कि आज के तेजी से बदलते तकनीकी युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस न्याय व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर और चुनौती दोनों प्रस्तुत कर रहा है। उन्होंने कहा कि अदालतों में संविधान की मूल भावना को बनाए रखते हुए एआई के उपयोग को संतुलित और जिम्मेदार तरीके से अपनाना आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आपराधिक, कॉर्पोरेट और सिविल कानूनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर ही न्याय प्रणाली को अधिक प्रभावी और समय अनुकूल बनाया जा सकता है।
विशिष्ट अतिथि के रूप में विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयुक्त महासचिव डॉ. सुरेंद्र जैन ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था की मूल शक्ति उसके संवैधानिक मूल्यों, सांस्कृतिक आधार और नैतिक दृष्टिकोण में निहित है। उन्होंने कहा कि एआई जैसे आधुनिक तकनीकी साधन न्याय प्रणाली को सशक्त बनाने में सहायक हो सकते हैं, लेकिन उनका उपयोग भारतीय संदर्भ और मूल्यों के अनुरूप होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों और शोधार्थियों को प्रेरित किया कि वे कानून को केवल पेशा न मानें, बल्कि समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण का माध्यम समझें।
अन्य विशिष्ठ अतिथि के रूप में दिल्ली के सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजीव जैन ने कहा कि न्याय प्रणाली का मूल उद्देश्य समयबद्ध, निष्पक्ष और सुलभ न्याय प्रदान करना है और एआई इस दिशा में एक प्रभावी साधन के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि अदालतों में बढ़ते मामलों के दबाव को कम करने और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक कुशल बनाने में एआई महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
कुलपति प्रो. संजय कौशिक ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय मंच विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को वैश्विक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं तथा उन्हें समकालीन चुनौतियों के समाधान के लिए प्रेरित करते हैं। इस दौरान डीन अकादमी अफेयर्स प्रो. नीरा वर्मा, विभागाध्यक्षा डॉ. कनुप्रिया सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी, प्राध्यापक व प्रतिभागी मौजूद रहे।

Girish Saini 

