गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा दो दिवसीय रिफ्रेशर कोर्स 'समाज, साहित्य और संस्कृति' का आयोजन
गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर के हिंदी-विभाग द्वारा मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र के सहयोग से दो दिवसीय रिफ्रेशर कोर्स 'समाज, साहित्य और संस्कृति' का सफल आयोजन किया गया।
अमृतसर: गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, अमृतसर के हिंदी-विभाग द्वारा मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केन्द्र के सहयोग से दो दिवसीय रिफ्रेशर कोर्स 'समाज, साहित्य और संस्कृति' का सफल आयोजन किया गया। हिंदी विभाग के अध्यक्ष और डीन, भाषा-संकाय प्रो. सुनील कुमार 'वत्स' ने जानकारी देते हुए बताया कि विश्वविद्यालय के यशस्वी उप-कुलपति प्रो. करमजीत सिंह के कुशल नेतृत्व और प्रेरणा से हिंदी विभाग द्वारा निरंतर साहित्यिक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इस कड़ी में फरवरी माह में ही हिंदी विभाग द्वारा चार बड़ी राष्ट्रीय संगोष्ठियों का आयोजन किया गया जिनकी चर्चा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर की जा रही है।
उन्होंने इस दो दिवसीय रिफ्रेशर कोर्स के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को 'समाज, साहित्य और संस्कृति' इन तीनों आयामों के पारस्परिक संबंधों से गहराई से परिचित कराना है। समाज, साहित्य और संस्कृति एक-दूसरे के पूरक हैं—समाज जीवन की वास्तविकताओं को जन्म देता है, साहित्य उन्हें अभिव्यक्ति प्रदान करता है और संस्कृति उन मूल्यों, परंपराओं एवं जीवन-दृष्टि को संरक्षित करती है जो पीढ़ियों को जोड़ती हैं।
इस रिफ्रेशर कोर्स में समकालीन सामाजिक चुनौतियों, भारतीय ज्ञान परंपरा, लोक संस्कृति, वैश्वीकरण, मीडिया प्रभाव, तथा नई साहित्यिक प्रवृत्तियों पर विशेषज्ञ वक्ताओं द्वारा व्याख्यान दिए गये। प्रतिभागियों को शोध-पद्धति, आलोचनात्मक दृष्टि और अंतरविषयी अध्ययन के महत्व से भी अवगत कराया गया। विभिन्न चर्चा सत्रों, प्रश्नोत्तर और संवादात्मक गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को अपने विचार साझा करने का अवसर मिला है, जिससे उनकी वैचारिक स्पष्टता और अकादमिक दृष्टिकोण सुदृढ़ हुई है। इस प्रकार यह दो दिवसीय रिफ्रेशर कोर्स न केवल ज्ञान-वृद्धि का मंच बना, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता, सांस्कृतिक चेतना और साहित्यिक समझ को विकसित करने का एक सार्थक प्रयास भी साबित हुआ है।
इस दौरान डॉ. विशाल भारद्वाज, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. विनय कुमार शुक्ला, डॉ. सुधा जितेंद्र, डॉ. शशांक शुक्ला, डॉ. मलकीत सिंह संधु, डॉ. बिहारी झा और डॉ. मनजिंदर सिंह ने अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए। इस कार्यक्रम में हिंदी विभाग के अध्यापकों, शोधार्थियों सहित कुल 50 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

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