पूर्व सीएम हुड्डा ने सरकार द्वारा लाडो लक्ष्मी योजना के नाम पर महिलाओं के साथ धोखा करने का आरोप लगाया

कहा, 2100 रुपये का लालच देकर भाजपा ने ली लाखों महिलाओं की वोट, अब शर्तें थोप रही।

पूर्व सीएम हुड्डा ने सरकार द्वारा लाडो लक्ष्मी योजना के नाम पर महिलाओं के साथ धोखा करने का आरोप लगाया

रोहतक, गिरीश सैनी। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भाजपा की राज्य सरकार पर लाडो लक्ष्मी योजना के नाम पर महिलाओं के साथ मजाक करने और धोखा करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि चुनाव में सभी महिलाओं को 2100 रुपये मासिक देने का वादा किया गया था, लेकिन अब केवल चंद महिलाओं को ही ये राशि दी जा रही है।

स्थानीय डी पार्क स्थित आवास मातूराम भवन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पूर्व सीएम हुड्डा ने बताया कि वर्ष 2024-25 में हरियाणा में 2.13 करोड़ लोग बीपीएल श्रेणी में थे, यानी इस योजना का लाभ लगभग 85 लाख महिलाओं को मिलना चाहिए था। लेकिन वर्तमान में सरकार केवल 8 लाख महिलाओं को ही राशि देने की बात कर रही है। उसमें भी अब कहा जा रहा है कि महिलाओं को केवल 1100 रुपये मिलेंगे और 1000 रुपये जमा किए जाएंगे। इस पर भी आय की सीमा, बच्चों की शिक्षा तथा कुपोषण जैसी शर्तें थोप दी गई हैं। उन्होंने कहा कि सरकार जानबूझकर ऐसी शर्तें लगा रही है, जिससे ज्यादातर महिलाएं स्वतः लाभार्थी सूची से बाहर हो जाएं।

इससे पहले पंचायत विभाग में कार्यरत सीपीएलओ कर्मियों ने पूर्व सीएम को ज्ञापन सौंपा। कर्मियों ने बताया कि उनकी भर्ती विज्ञापन संख्या 01/19-21 एचपीपीए-07 के अनुसार दिसंबर 2023 में सीपीएलओ पद के लिए की गई थी। इसके लिए 1000 रुपये फॉर्म फीस ली गई तथा प्री और मेन्स दोनों परीक्षाएं करवाई गईं। लेकिन रिजल्ट के समय भर्ती का स्वरूप बदलकर सीपीएलओ को एएसके ऑपरेटर और एलसीएलओ दो भागों में बांट दिया गया। एएसके ऑपरेटर का वेतनमान 6000 रुपये मासिक तथा एलसीएलओ का केवल कमीशन निर्धारित किया गया। कर्मियों को गलत पोस्ट पर जॉइनिंग दी गई, जो नियमों के विरुद्ध और असंवैधानिक है। हुड्डा ने कहा कि सरकार को इन कर्मियों की मांगों एवं समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए तथा शीघ्र समाधान निकालना चाहिए।

नेता प्रतिपक्ष हुड्डा ने भाजपा पर हरियाणा की अर्थव्यवस्था का बंटाधार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि चार्वाक की नीति पर चलते हुए सरकार ने लगातार कर्ज बढ़ाया है। 1966 से 2014 तक राज्य पर करीब 60 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था, जो अब 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। ये प्रदेश की आर्थिक बदहाली को दर्शाता है।