अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की क्रांति विषय पर बीएमयू में विस्तार व्याख्यान आयोजित
रोहतक, गिरीश सैनी। बाबा मस्तनाथ विवि, अस्थल बोहर के मानविकी संकाय के अंतर्गत पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग द्वारा आईक्यूएसी के सहयोग से अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ताः क्रांति का मार्गदर्शन विषय पर एक विस्तार व्याख्यान का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य शोधार्थियों, संकाय सदस्यों एवं विद्यार्थियों को आधुनिक अकादमिक अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बदलती और महत्वपूर्ण भूमिका से अवगत कराना था।
बतौर मुख्य वक्ता, एमसीएम डीएवी महिला महाविद्यालय, चंडीगढ़ की लाइब्रेरियन डॉ. रामनीक ने अपने व्याख्यान में अनुसंधान के विभिन्न आयामों में एआई की उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आज के डिजिटल युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता शोध कार्यों को अधिक सटीक, तेज और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
डॉ. रामनीक ने विशेष रूप से साहित्य समीक्षा, अकादमिक लेखन, उद्धरण प्रबंधन, साहित्यिक चोरी की पहचान तथा डेटा विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में एआई-आधारित उपकरणों के बढ़ते प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने विभिन्न आधुनिक एआई प्लेटफॉर्म के व्यावहारिक उपयोग का प्रदर्शन करते हुए बताया कि किस प्रकार शोधकर्ता इन तकनीकों की सहायता से शोध विषयों का चयन, व्यवस्थित समीक्षा, शोध लेखों का सारांश तैयार करना तथा अपनी उत्पादकता को बढ़ा सकते हैं। एआई के नैतिक पहलुओं पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग सदैव जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने शोध कार्यों में एआई के समावेशन के दौरान अकादमिक ईमानदारी बनाए रखने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।
पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभागाध्यक्षा डॉ. शीला डबास ने विवि पुस्तकालय की सेवाओं, संसाधनों एवं उनकी शैक्षणिक उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों को आधुनिक डिजिटल संसाधनों का अधिकतम उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का समन्वयन एवं संचालन डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया। मंच संचालन मनीषा ने किया। इस दौरान डॉ. प्रवेश कुमारी सहित विभाग के शोधार्थी, विद्यार्थी एवं संकाय सदस्य मौजूद रहे।

Girish Saini 

