मातृभूमि, संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान और प्रेम का भाव रखें सभीः डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान
स्कूल के वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह में किया बच्चों को सम्मानित।
नीलोखेड़ी, गिरीश सैनी। आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और वैज्ञानिक सोच का संतुलन ही सच्ची शिक्षा है। ये उद्गार हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने स्थानीय एसडीएमएन विद्या मंदिर,के जूनियर विंग में आयोजित वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह में व्यक्त किए।
शिक्षा समिति के महासचिव शिव नाथ कपूर ने मुख्य अतिथि डॉ. चौहान और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के विशेष प्रतिनिधि कविंद्र राणा का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों की देशभक्ति, धार्मिक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित जन का मन मोह लिया।
मुख्य अतिथि डॉ. चौहान ने कहा कि भारत की सभ्यता और ज्ञान परंपरा अत्यंत प्राचीन और समृद्ध रही है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि शल्य चिकित्सा (सर्जरी) की परंपरा भारत में हजारों वर्ष पहले से मौजूद थी। हमारे प्राचीन ग्रंथों और आयुर्वेदाचार्यों ने चिकित्सा के क्षेत्र में जो ज्ञान दिया, वह आज भी विश्व के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मातृभूमि के प्रति प्रेम का संदेश देते हुए उन्होंने भगवान राम का उदाहरण दिया और कहा कि जब श्रीराम ने सोने की लंका पर विजय प्राप्त की, तब भी उन्होंने वहां रहना स्वीकार नहीं किया, क्योंकि उन्हें अपनी मातृभूमि अयोध्या से गहरा प्रेम था। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी मातृभूमि, संस्कृति और परंपराओं के प्रति सम्मान और प्रेम का भाव रखना चाहिए।
डॉ. चौहान ने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की शुभकामनाएं देते हुए नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. चंद्रशेखर वेंकट रमन को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने विद्यार्थियों को विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़कर देश के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बच्चों की प्रस्तुतियों की भी सराहना की।
शिक्षा समिति के महासचिव शिव नाथ कपूर ने स्वागत संबोधन में बताया कि इस क्षेत्र की संभवत सबसे पुरानी संस्था के इस विद्यालय में लगभग 2000 छात्र अध्ययनरत हैं।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के विशेष प्रतिनिधि कविंद्र राणा ने अपने संबोधन में आधुनिकता की दौड़ का अंधानुकरण न करने का आह्वान करते हुए कहा कि बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपनी संस्कृति और संस्कारों का भी ज्ञान दिया जाना चाहिए। मंच पर प्रस्तुति देने वाले सभी बच्चों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया। इस दौरान सूरज दुआ, ज्ञान चंद अरोड़ा, सुभाष त्रेहन, सुरेंद्र भाटिया, रवींद्र मेहरा, प्राचार्या रेखा चौहान एवं दीपिका जुनेजा सहित काफी संख्या में अभिभावक, स्टाफ सदस्य व विद्यार्थी मौजूद रहे।

Girish Saini 

