एनाटॉमी विभाग की डॉ आरती ने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विशिष्ट पैनलिस्ट के रूप में शिरकत की

कुलपति डॉ एच.के अग्रवाल दी बधाई।

एनाटॉमी विभाग की डॉ आरती ने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विशिष्ट पैनलिस्ट के रूप में शिरकत की

रोहतक, गिरीश सैनी। पं. भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विवि के पीजीआईएमएस के एनाटॉमी विभाग ने शैक्षणिक एवं शोध उत्कृष्टता का परिचय देते हुए अंतरराष्ट्रीय मंच पर संस्थान का नाम रोशन किया है। जयपुर में आयोजित सोसाइटी ऑफ क्लिनिकल एनाटॉमिस्ट्स के 14वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विभाग द्वारा दो बेस्ट पेपर प्रेजेंटेशन पुरस्कार जीते गए। इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में 900 से अधिक राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतिभागियों ने सहभागिता की।

सम्मेलन के दौरान एनाटॉमी में करियर का भविष्य विषय पर आयोजित विशेष पैनल डिस्कशन में विभाग की डॉ. आरती को विशिष्ट पैनलिस्ट के रूप में आमंत्रित किया गया। डॉ. आरती को ये सम्मान एनाटॉमी शिक्षण में नवाचार, वर्चुअल डिसेक्शन तकनीक और यूजी-पीजी पाठ्यक्रम में क्लिनिकल कोरिलेशन को एकीकृत करने में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया। उन्होंने पैनल डिस्कशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित एनाटॉमी टीचिंग मॉड्यूल, आधुनिक चिकित्सा शिक्षा में एनाटॉमी के बदलते स्वरूप, उभरते करियर अवसरों और एनएएमसी के नए सीबीएमई करिकुलम पर अपने विचार रखे, जिसे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने सराहा।

वहीं, शोध क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए, डॉ. कमल सिंह एवं डॉ. सुमन यादव को बेस्ट ओरल/पोस्टर प्रेजेंटेशन के प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया। डॉ. कमल सिंह का शोध इमेज-आधारित एमसीक्यू एवं पारंपरिक एमसीक्यू के माध्यम से एनाटॉमी में फॉर्मेटिव असेसमेंट की प्रभावशीलता एवं छात्र दृष्टिकोण पर केंद्रित रहा। डॉ. सुमन यादव का शोध मेडिकल शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रति ज्ञान, धारणा एवं नैतिक जागरूकता पर आधारित था।

कुलपति डॉ एच.के. अग्रवाल ने एनाटॉमी विभाग की इस अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि पर विभागाध्यक्ष डॉ एस.के. राठी सहित सभी संकाय सदस्यों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि एनाटॉमी विभाग ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर उच्च स्तरीय शोध और अकादमिक विमर्श के माध्यम से विवि की शैक्षणिक साख को नई ऊंचाई दी है। ये उपलब्धि संस्थान की अनुसंधान-उन्मुख संस्कृति और शिक्षण उत्कृष्टता का प्रमाण है।

कुलपति ने कहा कि मजबूत एनाटॉमी ज्ञान ही एक कुशल चिकित्सक की नींव है। इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन संकाय को नवीनतम शिक्षण पद्धतियों और शोध प्रवृत्तियों से जोड़ते हैं, जिसका सीधा लाभ एमबीबीएस और पीजी छात्रों को मिलता है।

निदेशक डॉ एस.के. सिंघल ने बधाई देते हुए कहा कि क्लिनिकल एनाटॉमी आज के समय में पर्सनलाइज्ड मेडिसिन और मिनिमल इनवेसिव सर्जरी का आधार बन चुकी है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर मिले इस सम्मान से पता चलता है कि एनाटॉमी विभाग केवल कैडेवरिक टीचिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि ट्रांसलेशनल रिसर्च में भी अग्रणी है।

कुलसचिव डॉ रूप सिंह ने कहा कि विवि प्रशासन निरंतर प्रयासरत है कि सभी विभाग शोध और अकादमिक नवाचार को प्राथमिकता दें। उन्होंने डॉ आरती द्वारा पैनल डिस्कशन में दिए गए योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि एनाटॉमी में करियर की संभावनाओं पर राष्ट्रीय नीति-निर्माण में ऐसे विमर्श की अहम भूमिका होती है।

विभागाध्यक्ष डॉ एस.के. राठी ने विवि प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विभाग का लक्ष्य एनाटॉमी को केवल बेसिक साइंस नहीं, बल्कि क्लिनिकल प्रैक्टिस से जोड़कर पढ़ाना है। इस तीन दिवसीय सम्मेलन में वर्चुअल एनाटॉमी, 3डी प्रिंटिंग, रेडियोलॉजिकल एनाटॉमी और सर्जिकल एनाटॉमी पर केंद्रित कार्यशालाएं भी आयोजित हुई, जिनमें पीजीआईएमएस के प्रतिनिधिमंडल ने सक्रिय सहभागिता की।