पीएचडी शोध को आसान बनाएंगे डिजिटल टूल्सः गरिमा सिंह

विधि विभाग में रिसर्चसाथी पर व्याख्यान।

पीएचडी शोध को आसान बनाएंगे डिजिटल टूल्सः गरिमा सिंह

रोहतक, गिरीश सैनी। एमडीयू के विधि विभाग में शोधार्थियों के लिए रिसर्चसाथी- ए कम्पैनियन फॉर पीएचडी राइटिंग विषय पर आयोजित विस्तार व्याख्यान कार्यक्रम में शोधार्थियों को पीएचडी शोध कार्य को अधिक व्यवस्थित, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण बनाने में डिजिटल रिसर्च टूल्स की भूमिका के बारे में जानकारी दी गई।

बतौर विशेषज्ञ वक्ता, गरिमा सिंह ने अपने प्रभावी संबोधन में रिसर्चसाथी की उपयोगिता और कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि आधुनिक डिजिटल संसाधन शोधार्थियों के लिए शोध प्रक्रिया को अधिक सरल और व्यवस्थित बनाने में मददगार साबित हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि साहित्य की खोज और उसे व्यवस्थित करने से लेकर शोध सामग्री तैयार करने, अकादमिक लेखन को बेहतर बनाने और शोध सामग्री के परिष्कार तक विभिन्न चरणों में ऐसे टूल्स का उपयोग किया जा सकता है।

गरिमा सिंह ने कहा कि बदलते तकनीकी दौर में कानूनी शोध के क्षेत्र में डिजिटल संसाधनों का प्रभावी उपयोग समय की आवश्यकता है। शोधार्थियों को उपलब्ध तकनीकी सुविधाओं का सही और जिम्मेदारी के साथ उपयोग करते हुए अपने शोध की गुणवत्ता बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने रिसर्चसाथी के माध्यम से शोध कार्य को अधिक व्यवस्थित करने के विभिन्न व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी भी दी।

कार्यक्रम में विधि विभाग के शोधार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए रिसर्चसाथी के व्यावहारिक उपयोग और अपने शोध कार्य में इसके प्रयोग से जुड़े सवाल पूछे, जिनका वक्ता ने विस्तार से जवाब दिया। संवादात्मक सत्र के दौरान शोधार्थियों ने डिजिटल शोध उपकरणों को लेकर अपनी जिज्ञासाएं भी साझा की। इस दौरान विभाग के प्राध्यापक और शोधार्थी मौजूद रहे।