दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने की पूजा

दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने की पूजा

रोहतक, गिरीश सैनी। छल-कपट का त्याग कर मन, वचन और कर्म में सरलता व निष्कपटता का भाव धारण करना ही उत्तम आर्जव धर्म है। सेक्टर-1 स्थित भगवान पार्श्वनाथ दिगंबर जैन गजरथ मंदिर में दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की।

श्रद्धालुओं ने श्रीजी का जलाभिषेक किया। समाजसेवी विजय जैन के परिवार ने महाशांति धारा की। प्रतिष्ठाचार्य नितिन, विधानाचार्य पं. अनिल जैन व पं. देवेंद्र जैन के सानिध्य में विनय पाठ, पंचमेरु पूजन, सोलहकारण पूजा, दशलक्षण पूजन विधान और भगवान महावीर स्वामी की पूजा हुई। अष्टद्रव्य से निर्मित महाअर्घ्य अर्पित कर महाआरती की गई।

नितिन ने कहा कि उत्तम आर्जव धर्म का संदेश है—जो सोचें, वही कहें और जो कहें, वही करें। सरलता व निष्कपटता से आत्मस्वरूप का बोध होता है। शाम को संगीतमय महाआरती हुई। इस दौरान दीपा जैन, स्मृद्धि जैन, ताशी जैन, मुकेश जैन, अश्विनी जैन, सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।