बीएमयू में हुआ वैदिक संस्कृति और आधुनिक विज्ञान के अंतर्संबंध पर मंथन
रोहतक, गिरीश सैनी। बाबा मस्तनाथ विवि, अस्थल बोहर के संस्कृत विभाग द्वारा एक दिवसीय संस्कृत प्रसार व्याख्यान का आयोजन किया गया। वैदिक संस्कृति और आधुनिक विज्ञान का अंतरसंबंध विषय पर इस कार्यक्रम में विद्वानों ने वैदिक ज्ञान और समकालीन वैज्ञानिक दृष्टिकोण के बीच गहरे संबंधों पर सारगर्भित विचार प्रस्तुत किए।
बतौर मुख्य अतिथि, प्रो. कमल चंद्र योगी ने वैदिक साहित्य में निहित वैज्ञानिक तथ्यों को आधुनिक विज्ञान के संदर्भ में स्पष्ट करते हुए कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि वैज्ञानिक चिंतन की आधारशिला है। उन्होंने वेदों, उपनिषदों और अन्य प्राचीन ग्रंथों में वर्णित सिद्धांतों को आज के वैज्ञानिक अनुसंधानों से जोड़ते हुए बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा सदैव से वैज्ञानिक दृष्टि से समृद्ध रही है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. जगदीश भारद्वाज ने संस्कृत के संरक्षण, संवर्धन तथा उसे आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के व्याख्यान न केवल विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन में सहायक होते हैं, बल्कि उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी जोड़ते हैं। डॉ. बबलू शर्मा एवं डॉ. हरिओम ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार, उसकी वैज्ञानिक उपयोगिता तथा वर्तमान समय में उसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। अन्य विशिष्ट अतिथियों के रूप में डॉ. ब्रह्म प्रकाश, डॉ. बाबूराम तथा डॉ. मंजीत सहित अन्य विद्वान मौजूद रहे। व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए विषय से संबंधित अनेक जिज्ञासाएँ प्रस्तुत की, जिनका विद्वानों ने समाधान किया।

Girish Saini 

