उपायुक्त सचिन गुप्ता ने ग्रीष्मकालीन जल आपूर्ति व मानसून तैयारी मिशन मोड में करने के निर्देश दिए
शहरी क्षेत्रों में सीवरेज व स्टॉर्म वाटर नालों की सफाई के निर्देश।
रोहतक, गिरीश सैनी। उपायुक्त सचिन गुप्ता ने जिला में निर्बाध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने और शहरी जलभराव की समस्या को निपटाने के उद्देश्य से सभी संबंधित विभागों को मिशन मोड में कार्य करने तथा निर्धारित समय सीमा के भीतर समन्वित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नागरिक सुविधा, जन स्वास्थ्य और शहरी लचीलापन प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताएं हैं।
उपायुक्त सचिन गुप्ता ने नगर निगम आयुक्त डॉ. आनंद शर्मा व अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ मानसून पूर्व तैयारियों और ग्रीष्मकालीन जल आपूर्ति को लेकर आयोजित व्यापक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि हर घर तक स्वच्छ पेयजल सुनिश्चित करना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में, विशेषकर गर्मी के चरम समय में, पर्याप्त, सुरक्षित और समान रूप से पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
उपायुक्त ने कहा कि अवैध जल कनेक्शनों को काटा जाए ताकि पेयजल में गंदे पानी की मिलावट न हो। पाइपलाइन की गुणवत्ता सुनिश्चित कर लीकेज मुक्त आपूर्ति की जाए तथा टेल-एंड और संवेदनशील क्षेत्रों में टैंकरों के माध्यम से आपूर्ति सुदृढ़ की जाए। उन्होंने कहा कि जल अवसंरचना मजबूत करने के साथ-साथ क्षमता में वृद्धि की जा रही है। जेएलएन नहर और बीएसबी नहर से जल आपूर्ति की जा रही है। शहर में 5 प्रमुख नहर आधारित जलघर संचालित है तथा ट्यूबवेल की भी सुविधा है। शहर में 12.45 करोड़ रुपए से नवनिर्मित आईडीसी बूस्टर चालू किया गया है तथा 16.63 करोड़ रुपए की लागत से शहर की पुरानी क्षतिग्रस्त पाइपलाइन को बदला जाएगा। जलघर नंबर एक (सोनीपत रोड) का उन्नयन 27.23 करोड़ रुपये की राशि से किया जायेगा। इससे सोनीपत रोड पर स्थित वाटर चैनल को कवर किया जाएगा तथा जलघर के टैंकों की क्षमता बढ़ाई जाएगी। बोहर व गढ़ी-बोहर में क्षमता विस्तार प्रस्तावित है। गढ़ी बोहर और तिलियार के पास अतिरिक्त जल भंडारण टैंक हेतु भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है।
उपायुक्त ने कहा कि जिला में लगभग 600 किलोमीटर लंबा सीवरेज नेटवर्क स्थापित है, जिसमें 300 मिमी से 1400 मिमी तक व्यास की पाइपलाइन शामिल हैं। जिला में 15 सीवरेज डिस्पोजल प्वाइंट हैं, जिनकी कुल क्षमता 268.75 क्यूसेक है। इसके अतिरिक्त 7 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित हैं, जिनकी कुल क्षमता 130.50 एमएलडी है, जबकि वर्तमान में लगभग 75 एमएलडी सीवेज का उपचार किया जा रहा है। स्टॉर्म वाटर प्रबंधन के अंतर्गत लगभग 50 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई गई है तथा 16 स्टॉर्म वाटर डिस्पोजल प्वाइंट कार्यरत हैं, जिनकी कुल क्षमता 378.43 क्यूसेक है। प्रमुख आउटफॉल्स के माध्यम से पानी को विभिन्न ड्रेनों में डिस्चार्ज किया जा रहा है। यह प्रणाली 3–12 मिमी/घंटा वर्षा के लिए डिजाइन की गई है, हालांकि अत्यधिक वर्षा में अस्थायी जलभराव संभव है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि मानसून से पहले सभी नालों एवं ड्रेनों की सफाई (डी-सिल्टिंग) सुनिश्चित की जाए तथा जहां कहीं भी ड्रेनेज कनेक्टिविटी अधूरी है, उसे तुरंत पूरा किया जाए। साथ ही नालों के मुहानों पर स्क्रीन लगाने के निर्देश भी दिए गए ताकि ठोस कचरे से अवरोध न उत्पन्न हो। उन्होंने कहा कि सीवर में गोबर डालने वालों के चालान किए जाए। उन्होंने एचएसआईआईडीसी तथा जन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे आईडीसी एवं आईएमटी क्षेत्रों में पर्याप्त पेयजल उपलब्ध करवाने के प्रबंध करें। आर्ईडीसी में सीवरेज लाइन डालने का 95 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है तथा स्टॉर्म वाटर का कार्य भी जारी है। उन्होंने औद्योगिक एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से कहा कि वे कचरा निपटारे के लिए नगर निगम के अधिकारियों से बैठक करें। उन्होंने स्थानीय डबल फाटक के पास अंडरपास में जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए स्थाई समाधान करने के निर्देश दिए।
बैठक में पिछले मानसून के दौरान चिन्हित जलभराव वाले स्थानों की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए गए कि सभी लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर मानसून से पहले पूरा किया जाए। बस स्टैंड, सोनीपत स्टैंड, गोहाना रोड, जींद रोड, सेक्टर-4 क्षेत्र सहित कई स्थानों पर ड्रेनेज कनेक्टिविटी, सफाई और मरम्मत कार्यों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए। अवैध अतिक्रमण, छोटे या जाम ड्रेनों तथा आउटफॉल की समस्या को भी प्राथमिकता से दूर करने के निर्देश दिए गए।
इस दौरान नगर निगम की संयुक्त आयुक्त नमिता सिंह, जन स्वास्थ्य विभाग के अधीक्षक अभियंता शिवराज सहित नगर निगम, एचएसवीपी, एचएसआईआईडीसी तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में बताया गया कि विभिन्न स्टॉर्म वाटर एवं सीवरेज परियोजनाओं पर कार्य प्रगति पर है। पुराने ड्रेनों और सीवरेज लाइनों के पुनर्वास तथा डी-सिल्टिंग कार्यों को तेजी से पूरा किया जा रहा है। साथ ही कुछ महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी जारी है, जिससे भविष्य में जल आपूर्ति की कमी को दूर किया जा सके।

Girish Saini 

