डीसी सचिन गुप्ता ने सडक़ दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए समयबद्ध एवं परिणामोन्मुख कार्रवाई करने के निर्देश दिए

वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में सडक़ दुर्घटनाओं में मृत्यु दर में लगभग 20 प्रतिशत कमी।

डीसी सचिन गुप्ता ने सडक़ दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए समयबद्ध एवं परिणामोन्मुख कार्रवाई करने के निर्देश दिए

रोहतक, गिरीश सैनी। उपायुक्त सचिन गुप्ता ने विशेष रूप से राष्ट्रीय राजमार्गों पर प्रकाश व्यवस्था एवं एक्सेस कंट्रोल में सुधार, प्रमुख जंक्शनों पर ट्रैफिक सिग्नल अनुकूलन, शहरी एवं बाजार क्षेत्रों में पैदल यात्री सुविधाओं के त्वरित निर्माण तथा विभिन्न एजेंसियों, विशेषकर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा किए जा रहे सडक़ कार्यों में सुरक्षा मानकों के सख्त अनुपालन के निर्देश दिए हैं।

उपायुक्त सचिन गुप्ता ने जिला सडक़ सुरक्षा समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि पैदल यात्री सुरक्षा एवं ब्लैक स्पॉट सुधार भविष्य की सभी जिला सडक़ सुरक्षा समिति बैठकों का स्थायी एजेंडा रहेगा। सभी विभागों को कार्य पूर्णता तिथि एवं जियो-टैग्ड फोटो सहित एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए, ताकि पारदर्शिता, निगरानी एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। सुरक्षित सडक़ों के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता दोहराते हुए उपायुक्त ने कहा कि इंजीनियरिंग सुधार, सख्त प्रवर्तन एवं सतत जन-जागरूकता अभियान आपसी समन्वय से ही सडक़ दुर्घटनाओं एवं जनहानि में स्थायी कमी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा बहलबा स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर के सामने एवं मदीना में राष्ट्रीय राजमार्ग पर लगभग 35 करोड़ रुपये की धनराशि से व्हीकल अंडरपास का निर्माण करवाया जायेगा। उन्होंने कहा कि कलानौर में निगाना मोड़ से अवैध कब्जे 27 फरवरी तक हटवाना सुनिश्चित किया जाये तथा फुटपाथ का निर्माण भी करवाया जाये।

उपायुक्त ने बैठक में सडक़ दुर्घटनाओं की प्रवृत्ति, प्रवर्तन की प्रभावशीलता तथा विभिन्न विभागों द्वारा किए गए सुधारात्मक उपायों की व्यापक समीक्षा की। वर्ष 2025 तथा जनवरी 2026 के सडक़ दुर्घटना आंकड़ों की विस्तृत समीक्षा की गई। वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में सडक़ दुर्घटनाओं में मृत्यु दर में लगभग 20 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। उपायुक्त ने जनवरी 2026 में सामने आई नई घातक दुर्घटनाओं, विशेषकर पैदल यात्रियों, दोपहिया चालकों एवं रात्रिकालीन दुर्घटनाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि बार-बार सामने आ रहे दुर्घटना संभावित स्थलों तथा अपर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, असुरक्षित मीडियन कट, पैदल यात्री सुविधाओं का अभाव, तेज गति, अधूरे सडक़ कार्य तथा अनियंत्रित प्रवेश बिंदु जैसी समस्याएं गंभीर जोखिम उत्पन्न कर रही हैं। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि केवल समस्याओं की पहचान तक सीमित न रहकर समयबद्ध समाधान एवं जमीनी स्तर पर परिणाम सुनिश्चित किए जाएं। उन्होंने कहा कि सर्वाधिक घातक दुर्घटना स्थलों पर प्राथमिकता के आधार पर स्थायी इंजीनियरिंग समाधान लागू किए जाएं, जिनमें बेहतर प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षित पैदल पार मार्ग, चैनलाइजेशन, एक्सेस कंट्रोल एवं ट्रैफिक-कैल्मिंग उपाय शामिल हों।
उपायुक्त ने कहा कि स्कूलों, बाजारों, अस्पतालों एवं राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास पैदल यात्री सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। फुटपाथ, ज़ेब्रा क्रॉसिंग, रिफ्यूज आइलैंड, साइन बोर्ड एवं रोड मार्किंग निर्धारित मानकों के अनुसार अनिवार्य रूप से विकसित किए जाएं। सभी सडक़ मरम्मत एवं निर्माण स्थलों पर अस्थायी सुरक्षा उपाय—जैसे बैरिकेडिंग, रिफ्लेक्टर, चेतावनी संकेतक, ब्लिंकर एवं गति नियंत्रण - बिना किसी अपवाद के अनिवार्य किए जाएं। तेज गति, नशे में वाहन चलाना, हेलमेट एवं सीट बेल्ट उल्लंघन, गलत दिशा में वाहन चलाना तथा ओवरलोडिंग के विरुद्ध विशेष अभियान चलाए जाएं।

बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त नरेंद्र कुमार, एएसपी प्रतीक अग्रवाल, आरटीए सचिव वीरेंद्र सिंह ढुल, एसडीएम आशीष कुमार व विपिन कुमार, नगर निगम के संयुक्त आयुक्त मनजीत सिंह, डीडीपीओ राजपाल चहल, मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी तनुमय दत्ता, डीएमसी जितेंद्र सिंह के अलावा संबंधित विभागों के उच्च अधिकारी मौजूद रहे।