शिक्षा को व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ना जरूरी: डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान

एचआरडीआई और दयाल सिंह कॉलेज के बीच शैक्षणिक सहयोग हेतु हुआ एमओयू। 

शिक्षा को व्यावहारिक अनुभवों से जोड़ना जरूरी: डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान

करनाल, गिरीश सैनी। विद्यार्थियों को व्यवहारिक शिक्षा, कौशल विकास तथा ग्रामीण विकास की योजनाओं के क्रियान्वयन से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान, नीलोखेड़ी एवं दयाल सिंह कॉलेज, करनाल के बीच तीन वर्ष की अवधि के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। 

इस एमओयू पर हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान , नीलोखेड़ी की ओर से निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान तथा दयाल सिंह कॉलेज, करनाल की ओर से प्राचार्या डॉ. आशिमा गक्खड़ ने हस्ताक्षर किए। इस एमओयू का उद्देश्य विद्यार्थियों को ग्रामीण विकास, पंचायती राज व्यवस्था तथा राज्य एवं केंद्र सरकार द्वारा संचालित विकास योजनाओं की व्यावहारिक समझ प्रदान करना है।

निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि वर्तमान समय में उच्च शिक्षा को व्यवहारिक अनुभवों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। इस एमओयू के माध्यम से विद्यार्थियों को योजनाओं के धरातलीय क्रियान्वयन, सामुदायिक सहभागिता एवं प्रशासनिक प्रक्रियाओं को निकटता से समझने का मौका मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक सहयोग युवाओं को सामाजिक सरोकारों से जोड़ने के साथ-साथ उनके व्यक्तित्व विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

एमओयू के अनुसार हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान द्वारा दयाल सिंह कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए 4 से 6 सप्ताह की इंटर्नशिप एवं कौशल विकास कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों को ग्रामीण विकास, पंचायती राज संस्थाओं की कार्यप्रणाली, सामुदायिक विकास, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की जानकारी प्रदान की जाएगी। प्रतिभागी विद्यार्थियों का चयन पारदर्शी एवं पारस्परिक सहमति से निर्धारित मानदंडों के आधार पर किया जाएगा।

डॉ. चौहान ने कहा कि युवाओं की ऊर्जा, नवाचार एवं रचनात्मक सोच को ग्रामीण विकास की मुख्यधारा से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह साझेदारी विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, समस्या समाधान कौशल तथा सामाजिक संवेदनशीलता का विकास करने के साथ ही उन्हें ग्रामीण भारत की चुनौतियों एवं संभावनाओं को समझने का अवसर प्रदान करेगी, जिससे वे भविष्य में समाज एवं राष्ट्र निर्माण में अधिक प्रभावी योगदान दे सकेंगे।

समझौते के तहत एचआरडीआई विद्यार्थियों को आवश्यक संसाधन, प्रशिक्षण, मार्गदर्शन एवं परामर्श उपलब्ध कराएगा तथा उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन कर कॉलेज को फीडबैक प्रदान करेगा। वहीं दयाल सिंह कॉलेज पात्र विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें कार्यक्रमों से संबंधित आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएगा तथा प्रशिक्षण अवधि के दौरान संस्थान के साथ समन्वय स्थापित करेगा। कार्यक्रमों के सफल समापन पर विद्यार्थियों को एचआरडीआई द्वारा प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए जाएंगे।

प्राचार्या डॉ. आशिमा गक्खड़ ने कहा कि ये एमओयू विद्यार्थियों के शैक्षणिक एवं व्यावसायिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे विद्यार्थियों को व्यवहारिक अनुभव, कौशल विकास तथा ग्रामीण विकास की प्रक्रियाओं को निकटता से समझने का अवसर मिलेगा और उनके ज्ञान, व्यक्तित्व एवं रोजगार क्षमता में सकारात्मक वृद्धि होगी।

इस दौरान एचआरडीआई के सहायक आचार्य सुशील मेहता, कमलदीप सांगवान सहित अधिकारी एवं कर्मचारी तथा दयाल सिंह कॉलेज की ओर से इंटर्नशिप समन्वयक डॉ. देवेंद्र, सुपरवाइजर डॉ. पवन कुमार तथा अन्य प्राध्यापक मौजूद रहे।