23 महीने वेंटिलेटर पर रहा बच्चा, डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी
8 साल के बच्चे को पीजीआईएमएस से लगभग दो साल बाद मिली छुट्टी
रोहतक, गिरीश सैनी। मरीज में जीने की चाहत और डॉक्टरों के अथक प्रयास मिल जाएं तो मौत के मुंह से भी जिंदगी वापस लाई जा सकती है। पीजीआईएमएस के पीआईसीयू में डॉक्टरों ने इसका उदाहरण पेश करते हुए छह साल की उम्र में गंभीर हालत में भर्ती हुए बच्चे को करीब दो साल के इलाज के बाद नया जीवन दिया। बच्चा 23 महीने तक 100 प्रतिशत ऑक्सीजन और वेंटिलेटर सपोर्ट पर रहा।
सोमवार को बच्चे को स्वस्थ होने पर डिस्चार्ज किया गया। इस मौके पर पं. भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विवि के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल पीआईसीयू पहुंचे और चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ का हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा कि गंभीर मरीज को स्वस्थ होकर घर जाते देखना डॉक्टर के लिए सबसे बड़ी संतुष्टि है। उन्होंने पीआईसीयू इंचार्ज डॉ. कुंदन मित्तल और उनकी टीम के प्रयासों तथा बच्चे के माता-पिता के धैर्य की सराहना की।
डॉ. कुंदन मित्तल ने बताया कि बच्चे को 5 अक्टूबर 2024 को तेज बुखार, बेहोशी और हाथ-पैर न हिला पाने की स्थिति में भर्ती कराया गया था। लंबे उपचार के दौरान उसे लगातार वेंटिलेटर, ऑक्सीजन, फिजियोथेरेपी और पोषण संबंधी सहायता दी गई। अब बच्चा स्थिर है और अपने शरीर को हिला-डुला पा रहा है।
बच्चे के पिता गांव गढ़ी सिसाना निवासी सोमबीर, जो पेशे से टैक्सी चालक हैं, ने बेटे के इलाज के लिए दो साल तक काम छोड़े रखा, जबकि मां लगातार बच्चे के साथ रहीं। उन्होंने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ का आभार जताते हुए कहा कि पीजीआईएमएस उनके लिए दूसरा घर बन गया था।
23 महीने तक पीआईसीयू में रहने के कारण बच्चा नर्सिंग स्टाफ के लिए परिवार के सदस्य जैसा हो गया था। स्टाफ उसके जन्मदिन और परिवार की खुशियों में शामिल होता था। डिस्चार्ज के समय बच्चे के पिता ने डॉक्टरों के पैर छुए, केक काटा और मिठाई बांटी। भावुक माहौल में कई नर्सों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।

Girish Saini

