आत्महत्या पर चुप्पी तोड़ें, बातचीत शुरू करें: कुलपति डॉ. अग्रवाल

पीजीआईएमएस में जागरूकता अभियान आज।

आत्महत्या पर चुप्पी तोड़ें, बातचीत शुरू करें: कुलपति डॉ. अग्रवाल
डॉ सुजाता सेठी।

रोहतक, गिरीश सैनी। आत्महत्या जैसी गंभीर जन-स्वास्थ्य समस्या को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी भ्रांतियों व चुप्पी को तोड़ने के उद्देश्य से पीजीआईएमएस, रोहतक का मानसिक स्वास्थ्य संस्थान (आईएमएच) 10 सितंबर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस मनाएगा। इस वर्ष की थीम - आत्महत्या पर विमर्श को बदलना और आह्वान बातचीत शुरू करें - है।

आईएमएच की निदेशक-सह-सीईओ डॉ. सुजाता सेठी ने बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार देश में 1,70,746 लोगों ने आत्महत्या की। आत्महत्या की दर प्रति एक लाख आबादी पर 12.2 रही। इनमें 18 से 30 वर्ष तथा 30 से 45 वर्ष आयु वर्ग की हिस्सेदारी करीब दो-तिहाई रही। पारिवारिक समस्याएं 33.5 प्रतिशत मामलों में प्रमुख कारण रहीं, जबकि 17.9 प्रतिशत मामलों में बीमारी वजह बनी। दिहाड़ी मजदूर वर्ग कुल आत्महत्याओं में करीब 31 प्रतिशत के साथ सबसे अधिक प्रभावित रहा। हरियाणा में भी स्थिति चिंताजनक है।

कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कहा कि आत्महत्या को केवल व्यक्तिगत घटना मानने के बजाय इसके सामाजिक और भावनात्मक प्रभावों को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि आत्महत्या रोकी जा सकती है और इसकी रोकथाम की पहली सीढ़ी सार्थक बातचीत है। समाज को डर, मिथकों और कलंक से बाहर निकलकर संवेदनशीलता और सहयोग की संस्कृति अपनानी होगी।

पीजीआईएमएस निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता आज की बड़ी जरूरत है। तनाव में मदद मांगना कमजोरी नहीं, बल्कि साहस का प्रतीक है।

डॉ. सुजाता सेठी ने बताया कि कार्यक्रम के तहत डॉ. विद्यासागर ओपीडी परिसर में एक विशेष जागरूकता एवं हेल्प डेस्क लगाया जाएगा, जहां मरीजों और उनके परिजनों को आत्महत्या की रोकथाम, तनाव प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व के बारे में जानकारी दी जाएगी। एमबीबीएस छात्रों, इंटर्न और पीजी रेजिडेंट्स द्वारा एक जागरूकता पोस्टर प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। होगी। दोपहर कालीन सत्र में डॉ. सिद्धार्थ आर्य फैकल्टी व विद्यार्थियों के लिए एक इंटरैक्टिव जागरूकता सत्र लेंगे।