पीजीआईएमएस में राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने लिया टीबी मुक्त देश-प्रदेश बनाने का संकल्प
टीबी को खत्म करने के लिए जल्द पहचान जरूरीः कुलपति डॉ एच.के. अग्रवाल
रोहतक, गिरीश सैनी। पीजीआईएमएस, रोहतक में रविवार को आयोजित राष्ट्रीय स्तर की सीएमई कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टीबी मुक्त भारत अभियान को धार देने के लिए देश भर के विशेषज्ञों ने चर्चा की। ट्यूबरकुलोसिस डायग्नोसिस एंड मैनेजमेंटः द इमर्जिंग पैराडाइम विषय पर आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में देशभर से आए टीबी विशेषज्ञों ने हरियाणा को जल्द टीबी मुक्त बनाने का संकल्प लिया। पीजीआईएमएस, रोहतक और स्टेट ट्यूबरकुलोसिस सेल, एनटीईपी हरियाणा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि, कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने शिरकत की।
अपने संबोधन में कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कॉन्फ्रेंस की थीम की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम ज्ञानवर्धक होते हैं और साइंटिफिक एविडेंस के बारे में जानकारी मिलती है। उन्होंने कहा कि यहां प्राप्त जानकारी प्रदेश भर के मरीजों को फायदा पहुंचाएगी। कुलपति डॉ. अग्रवाल ने कहा कि टीबी को समाप्त करने के लिए इसकी कड़ी को तोड़ना होगा और उसके लिए जरूरी है इसके मरीजों की जल्दी पहचान।
निदेशक डॉ. सुरेश सिंघल ने कहा कि इस कॉन्फ्रेंस में एक्स-रे में टीबी देखने में एआई की भूमिका पर बात हुई। उन्होंने कहा कि इंडोर पेशेंट की स्क्रीनिंग के लिए एक टीम गठित की जाएगी।
निदेशक, हेल्थ सर्विसेज डॉ. ब्रह्मदीप सिंधु ने कहा कि टीबी जैसी चुनौती से निपटने के लिए देश भर में बेहतरीन कार्य कर रहा है। पीएम मोदी की टीबी मुक्त भारत मुहिम में हम सभी चिकित्सक एक टीम की तरह काम कर रहे हैं।
डीजीएचएस डॉ. मनीष बंसल ने कहा कि टीबी की डायग्नोसिस बढ़ी हैं और टीबी से मृत्यु दर कम हुई है। उन्होंने कहा कि सभी जिलों में बहुत जल्द ब्रोंकोस्कॉपी शुरू होगी, जिससे बिगड़ी हुई टीबी के मरीजों की पहचान आसान होगी।
लखनऊ से डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी ने टीबी से होने वाली मृत्यु को कम करने पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि वन बेड इन वन आईसीयू - टीबी पेशेंट के लिए रिजर्व करने पर कार्य हो रहा है।
आयोजन अध्यक्ष डॉ. ध्रुव चौधरी ने कहा कि बीमारी से सावधानी जरूरी होती है। उन्होंने कहा कि माइक्रोबायोलॉजी विभाग टीबी की पहचान करने में अहम भूमिका निभाता है।
उप निदेशक हेल्थ सर्विसेज डॉ. वीरेंद्र कुमार यादव और स्टेट ट्यूबरकुलोसिस ऑफिसर डॉ. राजेश राजू भी इस कॉन्फ्रेंस में मौजूद रहे। चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने माना कि हरियाणा में नई तकनीक, एआई आधारित डायग्नोसिस, शॉर्टर रेजिमेन और जिला स्तर पर ब्रोंकोस्कॉपी की सुविधा से टीबी उन्मूलन को नई गति मिलेगी। ये बताया गया कि दो हफ्ते से ज्यादा खांसी, बुखार, वजन कम होना टीबी के लक्षण हो सकते हैं। तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जांच कराएं, जहां इलाज पूरी तरह मुफ़्त है। इस दौरान चिकित्सा अधीक्षक डॉ कुंदन मित्तल, डॉ अपर्णा परमार, डॉ प्रेम प्रकाश, डॉ राजेश, डॉ विपुल, डॉ संदीप, डॉ नीलम, जनसंपर्क विभाग के इंचार्ज डॉ वरुण अरोड़ा, डॉ पवन, डॉ अमन आहूजा, डॉ अनुज सहित देश भर से विशेषज्ञ चिकित्सक मौजूद रहे।

Girish Saini 

