फौजी की पत्नी जाते-जाते दे गई छह जिंदगियों को जीवनदान

ब्रेन डेड घोषित 30 वर्षीय महिला के अंगदान को पति की सहमति; चंडीमंदिर से रोहतक तक बना ग्रीन कॉरिडोर।

फौजी की पत्नी जाते-जाते दे गई छह जिंदगियों को जीवनदान

रोहतक, गिरीश सैनी। सेना के जवान की 30 वर्षीय पत्नी ब्रेन हेमरेज के बाद दुनिया से विदा हुई, लेकिन जाते-जाते छह लोगों को जिंदगी दे गई। राजस्थान निवासी इस महिला के दो छोटे बच्चे है। चंडीमंदिर स्थित कमांड हॉस्पिटल में इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उसे ब्रेन डेड घोषित किया। पत्नी को खोने के असहनीय दुख के बीच फौजी पति ने अंगदान की सहमति देकर ऐसा फैसला लिया, जिसे मानवता की मिसाल माना जा रहा है।

पं. भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विवि (यूएचएसआर) के कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल ने कहा कि यह केवल अंगदान नहीं, बल्कि मानवता का महान बलिदान है। उन्होंने कहा कि फौजी परिवार देश की रक्षा में योगदान देता रहा है और अब इस परिवार ने अंगदान के जरिए छह लोगों को नया जीवन दिया है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अंगदान के लिए आगे आने की अपील की।

सोटो हरियाणा की स्टीयरिंग कमेटी के अध्यक्ष एवं पीजीआईएमएस निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने बताया कि सोटो, रोटो और नोटो के समन्वय से अंगों का नियमानुसार आवंटन किया गया। एक किडनी चंडीमंदिर कमांड हॉस्पिटल के मरीज को और दूसरी किडनी पीजीआईएमएस, रोहतक को मिली। लिवर आर्मी रिसर्च एंड रेफरल हॉस्पिटल, नई दिल्ली भेजा गया। दोनों कॉर्निया चंडीमंदिर अस्पताल को मिले, जबकि हृदय नोएडा के अस्पताल भेजा गया। इस तरह छह जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिलने की उम्मीद बनी।

कुलसचिव डॉ. रूप सिंह ने कहा कि ऐसे परिवारों के साहस से अंगदाताओं और जरूरतमंद मरीजों के बीच का अंतर कम हो रहा है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कुंदन मित्तल ने कहा कि एक पति ने अपने निजी दुख से ऊपर उठकर सोचा कि पत्नी की आंखों से कोई और दुनिया देख सकेगा और उसके अंग किसी दूसरे परिवार की खुशियां लौटा सकेंगे। उन्होंने अंगदान को लेकर फैली भ्रांतियां दूर करने की अपील की।

ग्रीन कॉरिडोर के जरिए अंगदान की किडनी पीजीआईएमएस, रोहतक पहुंचने पर कुलपति डॉ. एच.के. अग्रवाल, निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल, कुलसचिव डॉ. रूप सिंह, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मित्तल और सोटो हरियाणा के नोडल अधिकारी डॉ. सुखबीर सिंह सहित चिकित्सकों व विद्यार्थियों ने गेट पर पहुंचकर श्रद्धांजलि दी। सेंट्रल स्टोर से मॉड्यूलर ओटी तक फूल बिछाकर किडनी बॉक्स को सम्मानपूर्वक ले जाया गया।

कुलपति डॉ. अग्रवाल ने भावुक होकर कहा कि आज हम किसी मरीज का इलाज करने नहीं, एक शहीद मां को सलाम करने आए हैं। यह किडनी सिर्फ अंग नहीं, उस मां का आशीर्वाद है।

चंडीमंदिर से रोहतक तक बना ग्रीन कॉरिडोर

अंगों को समय पर पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती थी। कुलपति डॉ. अग्रवाल ने हरियाणा के डीजीपी अजय सिंघल से संपर्क किया, जिसके बाद हरियाणा पुलिस ने ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था की। इसमें हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ पुलिस सहित कई जिलों की पुलिस ने सहयोग किया। कुलपति ने पुलिसकर्मियों के इस प्रयास को मानवता के लिए बड़ा योगदान बताया।