डॉ अजय शर्मा द्वारा लिखित अप्रकाशित उपन्यास `ट्रंप कार्ड' का एक अंश

डॉ अजय शर्मा द्वारा लिखित अप्रकाशित उपन्यास `ट्रंप कार्ड' का एक अंश
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डॉ अजय शर्मा द्वारा लिखित प्रकाशनाधीन उपन्यास `ट्रंप कार्ड' का एक अंश यहाँ पाठकों के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है।  

अमेरिका-इजराइल और ईरान का युद्ध ऐसे शुरू हुआ, जैसे कोई बच्चा शतरंज की बिसात बिछा देता है। उसे खेलने में भी समय लगता है। कभी उसकी गोटियां ढूंढी जाती हैं, कभी उनको गिना जाता है। कई बार यह भी तय किया जाता है कि सफेद मोहरे कौन लेगा और काले कौन? बचपन में हम लोग गोटियों का रंग लेने के लिए कई बार टॉस करते थे। फिर कहीं जाकर बिसात बिछाई जाती है। लेकिन इस युद्ध में ऐसा लगता है, कुछ भी सोचा-समझा नहीं गया। शुरू में तो यह पता ही नहीं पता चला, किस बात को लेकर युद्ध शुरू हो गया? इस युद्ध की सबसे बड़ी बात यह है, राजा इस युद्ध में सबसे पहले मारा गया। शतरंज में अक्सर ऐसा होता है, बाजी शुरू होने के बाद राजा तक पहुंचने के लिए मोहरों का पूरा जाल बिछाया जाता है। तब जाकर राजा की चारों तरफ से किलाबंदी करके, राजा को घेरा जाता है। उसमें भी समय लगता है। फिर कहीं जाकर गेम चेक एंड मेट तक पहुंचती है। यानी राजा को चलने के लिए कोई घर नहीं बचता और बाजी खत्म हो जाती है।   इस युद्ध में, खेल शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया, जैसे बच्चों का कोई खेल हो। खेल में बिल्कुल उल्टी बात हुई थी, क्योंकि सबसे पहले राजा मारा गया। राजा के मरने के बाद शतरंज का बोर्ड बिना राजा के ही गोटियां बिछाए बैठा है। सामने वाले के पास कोई चाल ही नहीं है। आखिर वह करे तो क्या करे? दूसरा राजा अपनी पूरी सेना के साथ डट कर खड़ा है। वह सोच रहा है, अब हमें कोई खतरा नहीं है। जब राजा ही मार दिया, सेना का मनोबल टूटना स्वाभाविक है। राजा सोच रहा है, सामने वाले सारे मोहरे आत्म समर्पण कर देंगे और हमसे आजादी की भीख मांगेंगे। वह यह भी सोच रहा है, हम लोग अपनी मर्जी से किसी को भी राजा बना देंगे और सत्ता परिवर्तन कर देंगे। कोई बोलने वाला तक नहीं बचा। जब राजा ही मर गया और खेल खत्म हो गया, ऐसे में बिल्ली के गले में घंटी बांधेगा कौन? जो बांधने की कोशिश करेगा, उसे भी राजा के पास पहुंचा दिया जाएगा। जब लोग राजा के पास जाने शुरू हो जाएंगे, सबके होश ठिकाने आ जाएंगे। उसके बाद, चारों तरफ हमारा राज होगा। हमें रोकने-टोकने वाला कोई नहीं होगा। हमने जो सोच कर अटैक किया था, हम लोग उस मकसद में पूरी तरह से कामयाब हो जाएंगे। फिर तेल के कुओं पर भी हमारा कब्जा होगा और तेल पर भी। हम अपनी मर्जी से अपने हिसाब का रेट बना कर तेल बेचेंंगे। वैनजुयला के बाद ईरान के कब्जे में आते ही हम लोग तेल की लहरों पर राज करने लगेंगे। हम राजा हैं, आकाश, जमीन और पाताल के। हमें तेल की लहरों पर राज करने से कोई नहीं रोक सकता। राजा दूसरे राजा को मार कर अपने मन में ख्याली पुलाव बना रहा है और खुश हो रहा है। उस राजा को इस बात का अंदाजा नहीं था कि सामने भले ही राजा नहीं है, लेकिन हर मोहरा अपने अंदर राजा बनने का हुनर रखता है। वह बिना राजा के भी लड़ना जानता है। उसके पास युद्ध की पूरी रणनीति भले ही न हो, लेकिन जब सिर पर पड़ती है, तो रणनीति बनते देर नहीं लगती। वैसे भी जब कोई सिपाही चलता हुआ  खेलने वाले के खाने में पहुंच जाए तो वह वजीर बन जाता है और हारी हुई बाजी जीत जाता है। अमेरिका ने तो ऐसी बातें सपने में भी नहीं सोची होंगी। लेकिन कई बार सपने में न सोची हुई बातें ही, आपका काल बन जाती हैं। सारा ईरान खुसर-फुसर करने में व्यस्त है। सारी दुनिया का मीडिया अपनी तरह के कयास लगा रहा है। लगभग पूरी दुनिया ने मान लिया था, खेल खत्म हो चुका है, लेकिन जब एक-एक मोहरा, अपना सिर निकालने लगा, तो अमेरिका के माथे पर चिंता की लकीरें दिखने लगीं। 
ईरान के नेताओं ने भी ऐलान कर दिया, 'हम लोग डरे हुए बिल्कुल नहीं हैं। हम लोग डट कर मुकाबला करेंगे। हम लोग मैदान छोड़ कर भी नहीं भागेंगे।’
 ईरान के लोगों के चेहरे पर खौफ की लकीरें नहीं है, बल्कि उनके चेहरे इंतकाम लेने के लिए तड़प रहे हैं। उनके चेहरे दुश्मन के छक्के छुड़ाने के लिए अपने आप को तैयार कर रहे हैं। खामेनेई के मरने का शोक सबके मन में है। 
 खामेनेई द्वारा कहा हुआ एक-एक शब्द उनके दिमाग में गूंज रहा है, 'मैं रहूं न रहूं, लेकिन आप लोग, अपने मुल्क के लिए अपने लहू का हर कतरा बहा देना। कोई करूर भले ही आपके घर तक पहुंच जाए, लेकिन उन्हें नाकों चने चबा देना। हथियार नहीं छोडऩे हैं। हमें अपने आप से ऊपर उठ कर सोचना है। हमें अपने देश के लिए सोचना है। हमें सोचने से कोई नहीं रोक सकता। अगर दुश्मन घर में छुपा है, उसे माफ नहीं करना। दुश्मन से भी ज्यादा खतरनाक वह दुश्मन होता है, जो आपके घर में छुपा होता है।’
 ईरान में जो इक्का-दुक्का अधिकारी पहले दिन के अटैक के बाद बच गए थे, उनमें से एक ने कहा, 'शतरंज राजा के बिना अधूरी है। सबसे पहले इस पर किसी राजा की ताजपोशी कर दी जाए, ताकि आगे का प्लान बनाया जा सके। यह बात मीडिया द्वारा पूरी दुनिया में पहुंचा दी जाए।’ खामेनेई के मरने के बाद पूरी दुनिया में खलबली मच गई थी। 
(यहाँ उल्लेख किया जाता है कि जालंधर/पंजाब निवासी डॉ. अजय शर्मा केंद्र सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति के नामित सदस्य हैं। अब तक वे 18 उपन्यास, 6 नाटक और एक कहानी संग्रह लिख चुके हैं। उनके सात उपन्यास विभिन्न विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल हैं और उनकी कई रचनाओं का विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। उन्हें पंजाब सरकार का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ‘शिरोमणि साहित्यकार पुरस्कार’, उत्तर प्रदेश सरकार का ‘साहित्यिक सौरभ सम्मान’ और केंद्रीय हिंदी निदेशालय का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है।)