तुम्हारी व्यस्तता
आज तुम इतने व्यस्त हो गए कि
मुझसे दो पल बात करने की
फुर्सत नहीं निकाल पाए-
तुम्हें यह अहसास भी नहीं कि
तुम्हारी एक छोटी सी-सी खामोशी
मेरे वजूद में गहरा मौन भर देती है।
मैं हर मुश्किल राह पर
चल सकती हूं, हर हालात को
मुस्कराकर स्वीकार सकती हूं,
लेकिन तुम्हारी बातों के बिना
एक क्षण भी रह पाना मेरे लिए
ठीक वैसा ही है, जैसे सांसों
का बिछड़ जाना धड़कनों से।
जाने कब मेरी आदत और
मेरी जरूरत बन गए तुम,
इस हद तक सांसों में
घुल गए हो कि जब भी तुमसे
बात नहीं होती, तो लगता है
जैसे मेरे भीतर कुछ टूट गया है,
मेरा हिस्सा मुझसे ही, जैसे
पूरी तरह बिछड़ गया है ।
तुम्हारी आवाज़, तुम्हारी बातें,
तुम्हारा साथ—तुम्हारी परछाईं,
यही तो वे स्पंदन हैं जिनसे
मेरे जीवन में उजाले उतरते हैं—
और जब अचानक यह सब
मुझसे ओझल हो जाता है,
तो मन के आंगन में बिखर जाता
है एक अनकहा सूनापन ।
ऐसा लगता है जैसे
मैं अपने ही अस्तित्व से
कट गई हूं, जैसे मेरे अंदर
कुछ भी शेष नहीं बचा अब।
कभी-कभी तुम्हारा यह -
अनमना व्यवहार मुझे
उलझन में डाल देता है
मैं समझ हीं नहीं पाती कि
मेरे अंतस में जो तुम्हारी छवि
है, वह सचमुच क्या तुम ही हो।
क्योंकि जिस व्यक्ति को मैंने
अपने दिल के सबसे करीब
महसूस किया, वह तो मेरी
खामोशियों को भी सुन लेता था;
और आज वही मेरी प्रतीक्षा,
मेरी बेचैनी और मेरे एहसासों से
इतना अनजान कैसे हो गया ।
शायद तुम्हें अंदाज़ा नहीं
कि तुम्हारी अनुपस्थिति सिर्फ
कमी नहीं छोड़ती, वह मेरे
अंदर एक ऐसा निर्वात पैदा
कर जाती है, जहां हर धड़कन
तुम्हारा नाम लेकर तुम्हें
हमेशा पुकारती रहती है।
तुमसे बात न हो तो दिन
चुपचाप गुजर तो जाता है,
पर समय की हर धड़कन
जैसे ठहर सी जाती है,
और मैं अपनी पलकों पर
एक संदेश की आस लिए,
तुम्हारी आवाज़ की गर्माहट,
या तुम्हारे स्नेह से भरे
किसी छोटे-से एहसास की
राह तकती रह जाती हूँ।॥
टी शशिरंजन

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