अद्भुत यादें / अश्विनी जेतली प्रेम 

अद्भुत यादें / अश्विनी जेतली प्रेम 

बहुत विचित्र और अद्भुत होती हैं बचपन की यादें    
उनकी आग़ोश में स्वयं को पाकर  
बारिश में नंगे बदन नहा कर
गुज़रे हुए लम्हों का अहसास 
फिर से पाकर
बच्चा बन जाना  
और मुस्कुराना
विचित्र और अद्भुत होता है

बहुत अद्भुत होती हैं किशोरावस्था की महकती हुईं 
चहकती हुईं 
और कभी कभी तो बहकती हुईं 
यादें
क्लास से बंक मारकर
पिक्चर जाना
पकड़े जाने पर पिता से डंडे खाना
कान पकड़कर माफ़ी मांगना
और चार दिनों बाद 
लक्ष्मण सीमा फिर से लांघना


छूना उन यादों का दामन          
महका लेना उनसे अपना मन 
ये मस्ती ये पागलपन
बड़ा अच्छा लगता है    
वो समय, वो दौर ही फिर सच्चा लगता है

दिल चाहता है कि काश लौट आयें 
फिर से वो दिन
स्मृतियाँ बने वो अद्भुत और विचित्र से दिन

वृद्धावस्था के मोड़ पर 
जीवन के अंतिम छोर पर  
एक अद्भुत अहसास बन कर 
घेरे रहती हैं बीते दिनों की यादें   
सचमुच बहुत विचित्र और अद्भुत होती हैं यादें

पर जीवन की पुस्तक को पढ़ना 
उसी के पथ पर आगे बढ़ना
आदि से अनंत की ओर 
इक इक सीढ़ी चढ़ना
क्या अद्भुत नहीं होता?
होता है 
अतीत की यादों की तरह
वर्तमान भी विचित्र

ऐ मन!
वर्तमान के इन विचित्र क्षणों को
इस अंदाज से जीना 
कि तुम और तुम्हारा 'प्रेम'
सबको महकाएं
और सबके लिए, सारे जग के लिए , वो
इक अद्भुत विचित्र याद बन जाएं