दृश्य कला के छात्रों ने गांव की चौपाल को बदला आर्ट गैलरी में

दृश्य कला के छात्रों ने गांव की चौपाल को बदला आर्ट गैलरी में

रोहतक, गिरीश सैनी। दादा लख्मी चंद राज्य प्रदर्शन एवं दृश्य कला विवि (डीएलसी सुपवा), रोहतक के मास्टर इन विजुअल आर्ट्स के अंतिम वर्ष के छात्रों ने अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए गांव रिठाल फौगाट की चौपाल को आर्ट गैलरी के रूप में तब्दील कर दिया।

दृश्य कला के छह छात्रों हर्षुल शंकर, ज्योति, किरण सिंह, निखिल, रश्मि व सोनी ने मिलकर गिल्ड कलेक्टिव शीर्षक के तहत गांव की चौपाल को ही आर्ट गैलरी का रूप दिया है। मंगलवार शाम शुरू हुई ये आर्ट गैलरी तीन दिन तक जनता के अवलोकन के लिए खुली रहेगी। इसमें तीन दिन तक अलग-अलग आर्टिस्ट टॉक और आर्टिस्ट्स इंटरेक्शन सेशन आयोजित किया जाएगा। सायंकाल अलग-अलग फिल्मों की स्क्रीनिंग की जाएगी। पहले दिन अमन पूनिया निर्देशित फिल्म चूल्हा न्योंदा की स्क्रीनिंग की गई। आर्ट गैलरी में छात्रों ने अपनी ड्राइंग, पेंटिंग, फोटोग्राफी, इंस्टालेशन, प्रिंट, वीडियो, स्कल्पचर आदि का प्रदर्शन किया है।

विजुअल आर्ट्स फैकल्टी के एफसी विनय कुमार के अनुसार गांव की पारंपरिक चौपाल को संवाद, कहानी सुनाने व सामूहिक मिलन का स्थान माना जाता है। उसी से प्रेरित होकर छात्रों ने ये प्रदर्शनी चौपाल में लगाई है। ये पहली बार है, जब आर्ट गैलरी के लिए शहर की बजाय किसी गांव का चयन किया गया है। उन्होंने बताया कि छात्रों की आर्ट गैलरी जीवंत सांस्कृतिक साझा स्थान में बदली हुई नजर आई। विजुअल आर्ट्स, परफॉर्मिंग आर्ट, फिल्म स्क्रीनिंग, कलाकार वार्ता, कविता पाठ व सामूहिक समुदाय इंटरेक्शन के माध्यम से बनी ये आर्ट गैलरी ग्रामीण पहचान, समकालीन रचनात्मकता व साझा सार्वजनिक स्थानों के बीच बदलते संबंध से परिचय कराती दिखी। इसके क्यूरेटर शरद व विनय केडी हैं।

कुलपति डॉ अमित आर्य ने छात्रों के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि शहर की बजाय गांव की चौपाल को आर्ट गैलरी का रूप देने से पता चलता है कि छात्र समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना चाहते हैं।