हरियाणा में पहली बार विश्व बैंक समर्थित एकीकृत जल प्रबंधन परियोजना प्रदेश के लिए साबित होगी गेम चेंजरः सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी
विश्व बैंक की सहायता से एकीकृत जल प्रबंधन योजना पर खर्च होंगे लगभग 5,700 करोड़ रुपये।
रोहतक, गिरीश सैनी। हरियाणा की सिंचाई एवं जल संसाधन तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रुति चौधरी ने कहा कि पहली बार हरियाणा में लगभग 5,700 करोड़ रुपये की लागत से विश्व बैंक समर्थित एकीकृत जल प्रबंधन परियोजना (इंटीग्रेटेड वाटर प्लान) लागू की जा रही है, जो पूरे प्रदेश के लिए गेम चेंजर साबित होगी। प्रदेश में वर्तमान सरकार से पूर्व कांग्रेस शासनकाल के दौरान जनकल्याण के कार्यों पर ध्यान नहीं दिया गया।
मंत्री श्रुति चौधरी जिला लोक संपर्क एवं परिवेदना समिति की मासिक बैठक के उपरांत प्रेस प्रतिनिधियों से संवाद कर रही थी। पानी की उपलब्धता और सिंचाई व्यवस्था को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में सिंचाई मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार जल प्रबंधन को लेकर दीर्घकालिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रही है।
मंत्री श्रुति चौधरी ने कहा कि पूर्व में पानी के वितरण को लेकर स्थानीय और अस्थायी व्यवस्थाओं पर अधिक जोर दिया जाता था, जबकि वर्तमान सरकार पूरे सिंचाई तंत्र को एकीकृत दृष्टिकोण से विकसित कर रही है। इस परियोजना के तहत प्रदेश के सभी प्रमुख जल नियंत्रण केंद्रों पर आधुनिक एससीएडीए प्रणाली स्थापित की जाएगी, जिससे नहरों में बहने वाले पानी की मात्रा, वितरण व्यवस्था और टेल एंड तक पानी पहुंचने की वास्तविक समय में निगरानी की जा सकेगी।
उन्होंने कहा कि इस व्यापक योजना में माइक्रो इरिगेशन, भूजल पुनर्भरण, जल संरक्षण तथा कृषि पद्धतियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं को भी शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र तक समान और न्यायसंगत रूप से पानी पहुंचाना तथा जल संसाधनों का अधिकतम संरक्षण और उपयोग सुनिश्चित करना है। सिंचाई मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार जल प्रबंधन के क्षेत्र में पूरी गंभीरता और दूरदर्शिता के साथ कार्य कर रही है तथा हरियाणा के प्रत्येक नागरिक और किसान को इसका लाभ मिलेगा।
सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा बाढ़ प्रबंधन और आपदा पूर्व तैयारियों को मजबूत करने के उद्देश्य से लगभग 24 करोड़ 36 लाख रुपये की लागत से 19 गांवों में फ्लड वर्क्स योजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इन योजनाओं का उद्घाटन भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र लो-लाइंग होने के कारण बरसात और बाढ़ के दौरान विशेष रूप से प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जीवन रेखा मानी जाने वाली झज्जर सब ब्रांच नहर की वर्ष 1994 के बाद से व्यापक रीमॉडलिंग और रिलाइनिंग नहीं हुई है। लंबे समय से रखरखाव के अभाव में जल हानि की समस्या भी सामने आ रही थी। इसे ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में इस महत्वपूर्ण परियोजना को स्वीकृति दी गई है, जिसके तहत लगभग 14 करोड़ रुपये की लागत से नहर की रीमॉडलिंग का कार्य किया जाएगा। इससे क्षेत्र के किसानों और आसपास के इलाकों को सीधा लाभ मिलेगा।
Girish Saini 


