उर्दू शायरी और साहित्य के विकास में पंजाब ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है: प्रोफेसर अबूबकर अब्बाद
पंजाब में आज भी उर्दू भाषा और साहित्य के प्रति प्रेम तथा इसके विकास का जज़्बा प्रशंसनीय है।” इन विचारों को व्यक्त करते हुए प्रोफेसर अबूबकर अब्बाद ने “वर्तमान दौर में उर्दू कविता का महत्व” विषय पर पीयू में विशेष व्याख्यान देते हुए कहा कि पंजाब ने जिस तरह उर्दू भाषा के प्रारंभिक विकास और उसके प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है आज भी पंजाब के बिना उर्दू की कल्पना असंभव है।
चंडीगढ़, 11 अगस्त, 2025: पंजाब में आज भी उर्दू भाषा और साहित्य के प्रति प्रेम तथा इसके विकास का जज़्बा प्रशंसनीय है।” इन विचारों को व्यक्त करते हुए प्रोफेसर अबूबकर अब्बाद ने “वर्तमान दौर में उर्दू कविता का महत्व” विषय पर पीयू में विशेष व्याख्यान देते हुए कहा कि पंजाब ने जिस तरह उर्दू भाषा के प्रारंभिक विकास और उसके प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है आज भी पंजाब के बिना उर्दू की कल्पना असंभव है।
उर्दू कविता के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए प्रोफेसर अब्बाद ने फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, अल्लामा इक़बाल और अल्ताफ़ हुसैन हाली जैसे उर्दू शायरों की सेवाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नई नज़्म की राह पंजाब से ही निकलती है।
प्रोफेसर अबूबकर ने कहा कि पंजाब के विभिन्न शैक्षणिक और साहित्यिक संस्थानों में उर्दू शायरी और साहित्य के विकास के लिए आयोजित होने वाले कार्यक्रम और मुशायरे इस बात का प्रमाण हैं कि उर्दू से प्रेम करने वाले लोग आज भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं।
पंजाब विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग की साहित्यिक गतिविधियों की सराहना करते हुए प्रोफेसर अब्बाद ने कहा कि विद्यार्थियों का उर्दू भाषा से इस प्रकार जुड़ाव होना उर्दू के लिए अत्यंत सुखद और आशाजनक बात है। हमें विश्वास है कि पंजाब में उर्दू का भविष्य उज्ज्वल है।
अपने विशेष व्याख्यान के दौरान उन्होंने उर्दू की काव्य परंपरा पर चर्चा करते हुए वर्तमान दौर में नज़्म के महत्व और उपयोगिता पर भी विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि नज़्म विचारों की अभिव्यक्ति की एक प्रभावशाली विधा है और आज के शायर को अपने विचारों, भावनाओं और अनुभवों को नए ढंग और विशिष्ट लय में प्रस्तुत करने की अधिक स्वतंत्रता प्राप्त है। उनके अनुसार, वर्तमान दौर में नज़्म लिखने के लिए पारंपरिक बंधनों से अधिक महत्वपूर्ण यह है कि शायर अपने भावों और विचारों को कितने प्रभावशाली तथा रचनात्मक ढंग से पाठक तक पहुँचाने की क्षमता रखता है।
उन्होंने कविता को केवल शब्दों का समूह न मानते हुए उसे सार्थक और सुंदर शब्दों की कलात्मक व्यवस्था बताया। इस अवसर पर प्रोफेसर अबूबकर अब्बाद ने अपनी तीन नज़्में भी सुनाईं।
व्याख्यान के अंत में प्रोफेसर अब्बाद से विभिन्न प्रश्न भी पूछे गए, जिन पर उन्होंने विस्तारपूर्वक चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें रचनात्मक अभिव्यक्ति की ओर भी प्रेरित किया।
इस अवसर पर डॉ. अली अब्बास, अध्यक्ष, उर्दू विभाग, पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़, ने प्रोफेसर अबूबकर अब्बाद का विभाग में स्वागत किया और उनकी साहित्यिक एवं शैक्षणिक सेवाओं से विद्यार्थियों को परिचित कराया। उन्होंने उर्दू नज़्म की परंपरा, उसके शिल्प तथा वर्तमान दौर में उसकी महत्ता और उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि बदलती हुई सामाजिक और बौद्धिक परिस्थितियों में नज़्म अपनी अभिव्यक्ति की व्यापकता और विषयगत विविधता के कारण आज भी उर्दू साहित्य की एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली विधा के रूप में कायम है।
कार्यक्रम के अंत में प्रोफेसर रेहाना परवीन ने उर्दू विभाग के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए उपस्थित लोगों के लिए अपने शुभकामना एवं प्रार्थना-संबंधी शब्द प्रस्तुत किए।
फ़ारसी के शिक्षक डॉ. ज़ुल्फ़िकार अली ने कार्यक्रम के समापन पर मुख्य अतिथि प्रोफेसर अबूबकर अब्बाद, विभाग के शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि उर्दू विभाग में इस प्रकार के शैक्षणिक एवं साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन विद्यार्थियों के बौद्धिक विकास और उनकी मानसिक व्यापकता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उल्लेखनीय है कि इस अवसर पर उर्दू विभाग की शिक्षिका डॉ. ज़रीन फ़ातिमा, शोधार्थी रिज़वाना कौसर, सैयद सलीम बुखारी, शीतल वर्मा और ख़लीक़ुर्रहमान के अलावा विभाग के बड़ी संख्या में अन्य विद्यार्थी भी उपस्थित रहे।
City Air News 

