भारतीय शिक्षण मंडल द्वारा गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में पंजाब प्रांत की ज़िला लुधियाना ईकाई द्वारा आत्म देवकी निकेतन स्कूल में भव्य व्यास पूजा कार्यक्रम का आयोजन

भारतीय शिक्षण मंडल द्वारा गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में पंजाब प्रांत की ज़िला लुधियाना ईकाई द्वारा आत्म देवकी निकेतन स्कूल में भव्य व्यास पूजा कार्यक्रम का आयोजन

लुधियाना, 11 अगस्त, 2026: भारतीय शिक्षा दर्शन तथा शिक्षा में भारतीयता लाने एवं भारतीय शिक्षा प्रणाली को मूल्य आधारित बनाने के लिए प्रयासरत भारतीय शिक्षण मंडल  भारत के 28 राज्यों के 700 सेअधिक ज़िलों में शिक्षा के सांस्कृतिक पुनर्जागरण हेतु समर्पित भाव से कार्य कर रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय पुनरुत्थान के लिए कार्यरत वैचारिक संगठन भारतीय शिक्षण मंडल द्वारा देश भर में गुरु पूर्णिमा के संदर्भ में व्यास पूजा उत्सव के श्रृंख्लाबद्ध कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस श्रृंखला में  एक और कड़ी जोड़ते हुए लुधियाना ज़िले की ओर से मंगलवार को आत्म देवकी निकेतन स्कूल में व्यास पूजा का कार्यक्रम किया गया ।
इस अवसर पर स्कूल प्रिंसिपल मृदु अब्लश मुख्यातिथि के तौर पर उपस्थित रहे। स्कूल की हेड मिस्ट्रेस  प्रीति देम विशिष्ट अतिथि के तौर पर कार्यक्रम में शामिल रहे।
भारतीय शिक्षण मंडल की परम्परा अनुसार कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ सभी मंचासीन सदस्यों द्वारा दीप ज्योति प्रज्वलित करते हुए सरस्वती पूजन से किया गया। तत्पश्चात स्कूल के विद्यार्थियों के एक समूह द्वारा नवकार मंत्र तथा सरस्वती वंदना का सस्वर गायन किया गया। 
सर्वप्रथम  डा.पूनम सपरा (पूर्व महिला-मंडल गतिविधि सह-प्रमुख, पंजाब प्रांत) ने ध्येय श्लोक  एवं ध्येय वाक्य का उच्चारण किया। मुख्य वक्ता के तौर पर डा. पूनम सपरा ने  कहा कि भारतीय शिक्षा परम्परा में अनेक महान गुरुओं ने अपने शिष्यों के व्यक्तित्व को गढ़कर समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणास्रोत बनाया।उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भी गुरुओं और शिक्षकों  को आजीवन भारतीय शिक्षा पद्धति से सीखते हुए अपने शिष्यों का मार्गदर्शन करने के लिए तैयार रहना चाहिए। भले ही कृत्रिम बुद्धिमता  का दायरा कितना भी विशाल हो जाये लेकिन विद्यार्थियों की तार्किक बुद्धिमता को बढ़ाने का कार्य गुरु ही कर सकता है।सभागार में उपस्थित सभी छात्र छात्राओं ने परिचर्चा में  गुरुओं से सम्बंधित मुख्य वक्ता द्वारा पूछे जा रहे प्रश्नों के अत्यंत उत्साहित होकर उत्तर दिए।
विशेष सम्बोधन में डा.बबीता अरोड़ा ने कहा कि गुरु का उद्देश्य केवल विद्या देना ही नहीं बल्कि शिष्य में नैतिक मूल्यों और सर्वोपकार की भावना का विकास करना भी होता है। शिक्षक ही अपने शिष्यों  तथा समाज को उपयोगी बनने की प्रेरणा देता है। उन्होंने गुरु शिष्य परम्परा का वर्णन करते हुए भावी पीढ़ी को प्राचीन समृद्ध भारतीय शिक्षा पद्धति से सीखने के लिये प्रेरित किया।
मुख्यातिथि स्कूल प्रिंसिपल मृदु अब्लश ने कार्यक्रम की भरपूर सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन वर्तमान शिक्षा प्रणाली में भारतीयता लाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण  भूमिका निभा सकते है। उन्होंने कहा कि नि:संदेह ऐसे आयोजन नई शिक्षा नीति के अनुसार विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में सही दिशा देंगे।   स्कूल की हैड मिस्ट्रेस प्रीति देम ने  कार्यक्रम की भूरि भूरि प्रशंसा की।इस अवसर पर स्कूल के सभी स्टाफ सदस्यों सहित 300 से अधिक छात्र छात्राएँ शामिल हुए।
कार्यक्रम का सफलतापूर्वक मंच संचालन  कार्यक्रम समन्वयक मिनी कौशल ने किया। सह समन्वयक प्रेरणा अरोड़ा ने  सारे कार्यक्रम की सुचारू ढंग से व्यवस्था करने में सहयोग किया।स्कूल प्रिंसिपल मृदु अब्लश ने आये हुए वक्ताओं को उनके अमूल्य विचार पेश करने के लिए धन्यवाद किया।उन्होंने सारी उपस्थिति में शामिल शिक्षकों, विद्यार्थियों का तहेदिल से आभार व्यक्त किया। 
कार्यक्रम के अंत में डा.पूनम सपरा ने भारतीय शिक्षण मंडल द्वारा गठित  कल्याण मंत्र का उच्चारण किया तथा सारी उपस्थिति द्वारा सामूहिक रूप से राष्ट्रगान के उच्चारण से  कार्यक्रम को विराम दिया गया।।