समय पर इलाज से क्लब फुट पीड़ित बच्चे जी सकते हैं सामान्य जीवनः कुलसचिव डॉ. रूप सिंह

विश्व क्लब फुट दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित।

समय पर इलाज से क्लब फुट पीड़ित बच्चे जी सकते हैं सामान्य जीवनः कुलसचिव डॉ. रूप सिंह

रोहतक, गिरीश सैनी। विश्व क्लब फुट दिवस के अवसर पर पं. भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विवि के हड्डी रोग विभाग द्वारा बुधवार को क्लब फुट से पीड़ित बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें इलाज करा रहे बच्चों, उनके अभिभावकों और क्लब फुट क्लीनिक की पूरी टीम ने भाग लिया।

क्लब फुट से पीड़ित बच्चों ने कुलसचिव और हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ रूप सिंह के साथ मिलकर केक काटा। इस दौरान बच्चों को खाद्य सामग्री व उपहार भी वितरित किए गए। डॉ. रूप सिंह ने कहा कि क्लबफुट कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। अगर जन्म के तुरंत बाद इलाज शुरू कर दिया जाए और नियमित फॉलोअप हो तो बच्चा पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकता है। उन्होंने कहा कि माता-पिता को घबराने की जरूरत नहीं है, बस समय पर अस्पताल पहुंच कर इलाज जरूरी है।

विभागाध्यक्ष ने बताया कि क्लबफुट यानी जन्मजात मुड़े हुए पैर, सबसे आम हड्डी व मांसपेशी विकृति है। प्रति हजार नवजात में से एक बच्चा इस समस्या के साथ पैदा होता है। इलाज न मिलने पर बच्चा जीवनभर के लिए दिव्यांग हो सकता है और चलने-फिरने में दिक्कत आती है, लेकिन समय पर इलाज और सही देखभाल से 95% बच्चों के पैर पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि अभिभावक धैर्य रखें और इलाज बीच में न छोड़ें।

डॉ जितेंद्र वाधवानी ने बताया कि नवजात शिशु के एक या दोनों पैर अंदर की तरफ मुड़े होना, एड़ी का छोटा दिखना,  पैर सामान्य से अलग दिशा में मुड़ा होना जैसे लक्षण दिखते ही तुरंत हड्डी रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। उन्होंने बताया कि  पीजीआईएमएस, रोहतक में हड्डी रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रूप सिंह के नेतृत्व में क्लब फुट क्लीनिक  संचालित की जा रही है, जो हर सोमवार, बुधवार व शनिवार को कार्यरत होती है। यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य पोंसेटी विधि से इलाज किया जाता है, जिसमें क्रमबद्ध प्लास्टर, जरूरत पड़ने पर छोटी शल्य प्रक्रिया, विशेष जूते-ब्रेस, काउंसलिंग और लंबे समय तक फॉलोअप शामिल है। 

क्लब फुट क्लीनिक  के समन्वयक डॉ. जितेन्द्र ने बताया कि हर कार्य दिवस पर करीब 20 बच्चे प्लास्टर, जांच, ब्रेस और पुनर्वास के लिए आते हैं। क्योर इंडिया के सहयोग से क्लबफुट इंडिया प्रोग्राम के तहत यहां इलाज, ब्रेस, काउंसलिंग और फॉलोअप पूरी तरह निशुल्क है। अब तक यहां 1000 से अधिक बच्चों का सफल पंजीकरण और इलाज हो चुका है।

विभागाध्यक्ष डॉ. रूप सिंह ने अभिभावकों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से अपील की कि यदि किसी नवजात में बताए गए लक्षण दिखें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या पीजीआईएमएस, रोहतक संपर्क करें। जितनी जल्दी इलाज शुरू होगा, उतनी ही जल्दी और आसानी से पैर सीधे हो जाएंगे।