कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ ने यूआईईटी के शिक्षकों व शोधार्थियों से किया संवाद
इंडस्ट्री कनेक्ट, हैंड्स ऑन ट्रेनिंग,रिसर्च ग्रांट्स, इंटरडिसिप्लिनरी अप्रोच, स्टूडेंट्स इंटरेक्शन और एलुमनाई नेटवर्क पर फोकस की बात कही।
रोहतक, गिरीश सैनी। एमडीयू के कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ ने वीरवार को यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (यूआईईटी) का दौरा कर शिक्षकों और शोधार्थियों से संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों तथा शोधार्थियों के क्षमता संवर्धन पर विशेष बल देते हुए इस परिपेक्ष्य में यूआईईटी द्वारा प्रभावी कार्य योजना तैयार करने के दिशा-निर्देश दिए। विद्यार्थियों को नवीनतम तकनीक तथा प्रौद्योगिकी का व्यावहारिक प्रशिक्षण देने पर फोकस करते हुए कुलपति ने उनको उद्योग जगत की ज़रूरतों के अनुरूप तैयार करने की की बात कही।
कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ ने स्टूडेंट सेंट्रिक सेमिनार और वर्कशॉप नियमित रूप से आयोजित करवाने पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग को बढ़ावा देने की बात कही और कहा कि विद्यार्थी जितना अधिक प्रैक्टिकल अनुभव प्राप्त करेंगे, उनके लिए रोजगार और नवाचार के अवसर उतने ही मजबूत होंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को उद्योगों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ने वाली गतिविधियां बढ़ाने की बात भी कही।
कुलपति प्रो. पूनियाँ ने इंडस्ट्री पार्टनरशिप, कोलाब्रेशन और आउटरीच गतिविधियों को मजबूत करने पर भी जोर देते हुए कहा कि उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल विद्यार्थियों को नई तकनीकों और करियर अवसरों से जोड़ने में मदद करेगा। उन्होंने एलुमनाई नेटवर्क को सुदृढ़ करने की जरूरत बताते हुए कहा कि पूर्व विद्यार्थियों के अनुभव और सहयोग से संस्थान नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।
उन्होंने बाहरी एजेंसियों से रिसर्च ग्रांट्स लाने, सामूहिक टीम भावना के साथ कार्य करने तथा शिक्षकों और विद्यार्थियों के बीच संवाद बढ़ाने की बात कही। नियमित क्लास टीचिंग, स्टूडेंट्स इंटरेक्शन और इंटरडिसिप्लिनरी अप्रोच अपनाने पर जोर देते हुए कुलपति ने कहा कि आज के दौर में बहुविषयक समझ ही तकनीकी शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाएगी।
यूआईईटी निदेशक प्रो. विनीत सिंगला ने कुलपति को संस्थान में संचालित पाठ्यक्रमों, शैक्षणिक गतिविधियों तथा भविष्य की योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान यूसीसीई निदेशक प्रो. युद्धवीर सिंह, परीक्षा नियंत्रक प्रो. राहुल ऋषि, डॉ. प्रदीप गहलोत, डॉ. विपिन सैनी, डॉ. अरुण हुड्डा सहित अन्य प्राध्यापक व शोधार्थी मौजूद रहे।

Girish Saini 

