कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ ने विद्यार्थियों से आपदा प्रबंधन में दक्ष बनने का आह्वान किया
एमडीयू में वाईआरसी प्रशिक्षण कार्यक्रम में दी फर्स्ट एड, सिविल डिफेंस और फायर सेफ्टी की ट्रेनिंग।
रोहतक, गिरीश सैनी। प्राकृतिक आपदा, आगजनी या किसी भी आपात स्थिति में जान बचाने के लिए युवाओं का प्राथमिक उपचार, सीपीआर और आपदा प्रबंधन में प्रशिक्षित होना जरूरी है। हर विद्यार्थी को आपदा प्रबंधन में दक्ष होकर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। ये उद्गार एमडीयू के कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ ने स्वराज सदन में यूथ रेड क्रॉस समिति की ओर से आयोजित एक दिवसीय सामान्य प्राथमिक उपचार एवं आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर व्यक्त किए।
कुलपति प्रो. मिलाप पूनियाँ ने कहा कि आपदा प्रबंधन के तीन प्रमुख चरण- आपदा से पहले तैयारी, आपदा के जोखिम को कम करना और आपदा के दौरान प्रभावी प्रतिक्रिया को समझना जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ साथ, विवि के सुरक्षा कर्मियों, पुस्तकालय और छात्रावास के कर्मचारियों को भी प्राथमिक उपचार, सीपीआर और अग्निशमन का प्रशिक्षण देने पर जोर दिया।
कुलसचिव प्रो. संदीप बंसल ने कहा कि आपदा के समय वाईआरसी स्वयंसेवकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रशिक्षण को गंभीरता से लेने और व्यावहारिक दक्षता हासिल करने का आह्वान किया।
इस दौरान जिला रेड क्रॉस सोसायटी, रोहतक के जिला प्रशिक्षण अधिकारी रवि दत्त ने प्राथमिक उपचार के स्वर्णिम नियम विषय पर तकनीकी सत्र लिया। सिविल डिफेंस कार्यालय, रोहतक की टीम ने शील्ड एंड सर्वः सिविल डिफेंस इमरजेंसी ट्रेनिंग विषय पर प्रशिक्षण दिया। फायर स्टेशन ऑफिसर जसमेद और उनकी टीम ने आपदा प्रबंधन पर प्रशिक्षण एवं व्यावहारिक प्रदर्शन किया। वाईआरसी प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर प्रो. अंजू धीमान ने स्वागत संबोधन किया। डीन, छात्र कल्याण प्रो. सपना गर्ग ने कार्यक्रम की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
Girish Saini 


