भारतीय ज्ञान परंपरा का उत्सव है वसंत पंचमीः डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान

महापुरुषों के विचारों को पढ़-समझ कर आचरण में उतारें विद्यार्थी।

भारतीय ज्ञान परंपरा का उत्सव है वसंत पंचमीः डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान

असंध, गिरीश सैनी। पराक्रम दिवस, वसंत पंचमी और दीनबंधु छोटूराम जयंती जैसे अवसर हमारे लिए मात्र स्मरण के नहीं, बल्कि राष्ट्र, समाज और संस्कृति से जुड़े मूल्यों को जीवन में उतारने के प्रेरक दिवस हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस का पराक्रम, वसंत पंचमी का ज्ञान-संस्कार और दीनबंधु छोटूराम का सामाजिक न्याय - तीनों मिलकर भारत की आत्मा का निर्माण करते हैं। ये उद्गार हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान, नीलोखेड़ी के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने हारट्रोन केंद्र, असंध में आयोजित एक विचार गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि विद्यार्थियों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए व्यक्त किये।


डॉ. चौहान ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजादी के लिए जो साहसिक मार्ग चुना, वह आज की युवा पीढ़ी को राष्ट्रहित में निडर होकर कार्य करने की प्रेरणा देता है। वहीं, वसंत पंचमी भारतीय ज्ञान परंपरा का उत्सव है, जो शिक्षा को केवल रोजगार नहीं बल्कि संस्कार का माध्यम मानती है। दीनबंधु छोटूराम को किसान, मजदूर और वंचित वर्गों का सच्चे हितैषी बताते हुए उन्होंने कहा कि उनके संघर्षों के कारण ही आज ग्रामीण समाज को सम्मान और अधिकार की भाषा मिली। डॉ. चौहान ने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे इन महापुरुषों के विचारों को पढ़ें, समझें और अपने आचरण में उतारें।


कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए केंद्र संचालक राम रूप शर्मा ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के अंदर राष्ट्र बोध, सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक गर्व का विकास करते हैं। बतौर विशिष्ट अतिथि, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं भारत विकास परिषद के पूर्व अध्यक्ष नरेंद्र शर्मा ने कहा कि दीनबंधु छोटूराम का जीवन सामाजिक सुधारों की जीवंत पाठशाला है और उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने युवाओं से संविधान, कर्तव्य और सामाजिक समरसता को समझने का आग्रह किया।

 

इस दौरान अधिवक्ता नरेंद्र शर्मा, कृष्ण, शिक्षक गीता देवी, पायल, शुभम, सोनम, पल्लवी सहित शिक्षकों, विद्यार्थियों और गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी रही। अंत में आयोजित प्रश्नोत्तरी सत्र में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।