प्रौद्योगिकी के सदुपयोग से बढ़ी पारदर्शिता, भ्रष्टाचार पर लगा अंकुशः डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान
ग्रामीण विकास योजना में भौगोलिक सूचना प्रणाली की भूमिका विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम।
नीलोखेड़ी, गिरीश सैनी। ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भौगोलिक सूचना प्रणाली अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। ये विचार हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने ग्रामीण विकास योजना में भौगोलिक सूचना प्रणाली की भूमिका विषय पर आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों के साथ साझा किए। डॉ. चौहान ने कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया।
डॉ वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि प्रौद्योगिकी का सही तरीके से उपयोग करने से विकास कार्यों में पारदर्शिता आई है और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा है। लेकिन कई बार इसके उपयोग में विभिन्न प्रकार की बाधाएं भी आती हैं, जिन्हें दूर करने के लिए भी हमें समाधान और बेहतर तरीके खोजने चाहिए, ताकि तकनीक का पूरा लाभ ग्रामीण विकास योजनाओं में लिया जा सके। उन्होंने प्रतिभागियों का आह्वान किया कि यहां से जाने के बाद अपने कौशल का विस्तार कर अपने कार्यक्षेत्र में इन तकनीकों का प्रभावी उपयोग करें।
निदेशक डॉ. चौहान ने प्रतिभागियों को केंद्र सरकार की विभिन्न महत्वपूर्ण योजनाओं से अवगत कराया। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराना और जल संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन करना है, ताकि -हर खेत को पानी के लक्ष्य को पूरा किया जा सके। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के बारे में बताते हुए कहा कि इस योजना के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे उनका जीवन स्तर बेहतर हो सके।
हिंदी भाषा के महत्व पर जोर देते हुए डॉ. चौहान ने कहा कि हम हरियाणा के निवासी हैं और हरियाणा हिंदी भाषी प्रदेश है। भारत की राजभाषा भी हिंदी है, इसलिए हमें अपनी भाषा का स्वाभिमान और गर्व के साथ प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने प्रतिभागियों का आह्वान किया कि वे अपने हस्ताक्षर भी हिंदी में करना शुरू करें और सरकारी कार्यों के साथ-साथ अपने दैनिक जीवन में भी हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग अनजाने में अंग्रेजी में बात करना ही पढ़ा-लिखा होने का प्रतीक मान लेते हैं, जबकि हमारी भाषा हिंदी अंग्रेजी से कहीं अधिक समृद्ध और सरल है। उन्होंने कहा कि हिंदी अपेक्षाकृत अधिक वैज्ञानिक और सहज भाषा है। इस दौरान उपस्थित प्रतिभागियों को हिंदी के प्रयोग का संकल्प भी दिलवाया गया।
कार्यक्रम के समन्वयक संस्थान के संकाय सदस्य कमलदीप सांगवान रहे। इस दौरान अतिरिक्त खंड कार्यक्रम अधिकारी डॉ सुरेश, जसविंदर गिल, संदीप शर्मा, चंद्रपाल, दिनेश, महेश कुमार सहित अंबाला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, करनाल, पंचकुला, पानीपत, सोनीपत व कैथल जिलों से आए प्रतिभागी मौजूद रहे। प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने भौगोलिक सूचना प्रणाली के उपयोग और इसके व्यावहारिक पहलुओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

Girish Saini 

